“बस्ती में आस्था और पर्यावरण पर ‘हॉटमिक्स’ का वार: मल्लूपुर धोरसाएं में ग्रामीण लामबंद, आंदोलन की दी चेतावनी”
"घनी आबादी के बीच हॉटमिक्स प्लांट की साजिश: नियम ताक पर, ग्रामीणों ने कहा—पर्यावरण से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं"
।। प्रशासन की आंखों पर पट्टी, या विनाश की आहट? आम के बाग और मंदिर के बीच ‘जहर’ उगलने की तैयारी।।
[विशेष रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी)]
बस्ती/छावनी। विकास की अंधी दौड़ में क्या हम अपनी सांसों का सौदा कर लेंगे? बस्ती जनपद के मल्लूपुर धोरसाएं गांव से जो खबर आ रही है, वह न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि व्यवस्था के संवेदनहीन चेहरे को भी उजागर करती है। यहां एक हॉटमिक्स प्लांट लगाने की तैयारी चल रही है, लेकिन जिस जगह का चुनाव किया गया है, उसे देखकर स्थानीय ग्रामीणों का पारा सातवें आसमान पर है।
आस्था और हरियाली पर ‘हॉटमिक्स’ का प्रहार
प्रस्तावित प्लांट के ठीक बगल में आम का विशाल बगीचा है, जो न केवल गांव की हरियाली है बल्कि ग्रामीणों की आजीविका का साधन भी। वहीं दूसरी ओर, एक प्राचीन मंदिर है, जहां गांव की श्रद्धा बसती है। ग्रामीणों का सवाल जायज है: जहां सुबह-शाम घंटियों की आवाज और शुद्ध हवा मिलनी चाहिए, क्या वहां अब डामर का काला धुआं और जहरीली धूल उड़ेगी?
सामाजिक अपराध की श्रेणी में है यह कदम
ग्रामीणों ने इस प्रस्तावित प्लांट को ‘सामाजिक अपराध’ करार दिया है। हॉटमिक्स प्लांट से निकलने वाला सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जहरीले तत्व न केवल आम की फसलों को बर्बाद कर देंगे, बल्कि आसपास की घनी आबादी, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़ों को भी छलनी कर देंगे।
“क्या प्रशासन को घनी आबादी, पवित्र मंदिर और ये लहलहाते बाग दिखाई नहीं देते? क्या चंद पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए पूरे गांव की सेहत को दांव पर लगा दिया जाएगा?” — ग्रामीणों का सामूहिक आक्रोश
धुआं उठने से पहले उठी विरोध की चिंगारी
अभी प्लांट चालू नहीं हुआ है, लेकिन विरोध की आग धधक चुकी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे पर्यावरण और आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। वशिष्ठनगर और आसपास के इलाकों में इस मुद्दे को लेकर भारी तनाव है।
मुख्य आपत्तियां:
स्वास्थ्य का संकट: धूल और धुएं से सांस की गंभीर बीमारियां होने का खतरा।
पर्यावरणीय विनाश: आम के बागों की पैदावार पर सीधा असर।
धार्मिक भावनाएं: मंदिर की पवित्रता और शांति का भंग होना।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
क्या स्थानीय प्रशासन जनभावनाओं की अनदेखी कर रहा है? यदि समय रहते इस घातक परियोजना को आबादी से दूर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो ग्रामीणों का यह आक्रोश एक बड़े लोकतांत्रिक आंदोलन का रूप ले सकता है। मल्लूपुर धोरसाएं के लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
जिम्मेदारों को अब तय करना होगा कि उन्हें विकास की ऐसी डामर वाली सड़क चाहिए, जो गांव के बच्चों के भविष्य की राख पर बिछाई जाए, या उन्हें जन-स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करनी है।









