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“बस्ती: ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीजों की जान से ‘अंधा खेल’, बिना डॉक्टर के हस्ताक्षर के धड़ल्ले से बांटी जा रही अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट!”

"900 रुपये की फीस और तीन-तीन डॉक्टरों के नाम, फिर भी रिपोर्ट से हस्ताक्षर गायब; क्या स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से चल रहा है यह बड़ा खेल?"

बस्ती: स्वास्थ्य विभाग की ‘आंखों’ पर पट्टी, ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीजों की जिंदगी से ‘अंधा’ खेल!

अजीत मिश्रा (खोजी), बस्ती

बस्ती।। जिला अस्पताल के गेट नंबर एक के ठीक बगल में स्थित ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर इन दिनों अपनी रिपोर्टिंग को लेकर नहीं, बल्कि रिपोर्ट से गायब ‘डॉक्टरों के हस्ताक्षरों’ को लेकर चर्चा के केंद्र में है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रिपोर्ट ने न केवल इस सेंटर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जिले के स्वास्थ्य महकमे की चुप्पी को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

💫तीन नाम, पर हस्ताक्षर एक भी नहीं!

हैरानी की बात यह है कि जिस अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के लिए मरीज से 900 रुपये जैसी मोटी रकम वसूली जाती है, उस पर एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों के नाम दर्ज हैं। लेकिन विडंबना देखिए—पूरी रिपोर्ट में एक भी डॉक्टर का स्पष्ट हस्ताक्षर मौजूद नहीं है। बिना किसी जिम्मेदार डॉक्टर के प्रमाणीकरण के मरीजों को रिपोर्ट थमा दी जा रही है।

“जब रिपोर्ट पर किसी डॉक्टर की जवाबदेही ही तय नहीं है, तो उस रिपोर्ट के आधार पर होने वाले इलाज की गारंटी कौन लेगा? क्या यह सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं है?” — एक पीड़ित मरीज

💫घंटों का इंतजार और भारी लूट

ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर अपनी ‘ब्रांडिंग’ के दम पर बस्ती जिले में अपनी धाक जमाए बैठा है। यहां अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को घंटों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। भारी भरकम फीस वसूलने के बावजूद बिना हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट देना यह दर्शाता है कि सेंटर के संचालकों को नियम-कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं है।

💫स्वास्थ्य विभाग की ‘रहस्यमयी’ खामोशी

सूत्रों की मानें तो यह पूरा खेल स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लिए कड़े नियम हैं, लेकिन ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर पर ये नियम कागजी साबित हो रहे हैं। क्या जिले का स्वास्थ्य विभाग केवल फाइलों को रंगे जाने का इंतजार कर रहा है या किसी बड़े हादसे का?

💫मुख्य सवाल जो जांच की मांग करते हैं:

🔥क्या अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कोई अधिकृत डॉक्टर मौजूद रहता भी है या केवल टेक्नीशियन के भरोसे खेल चल रहा है?

🔥बिना हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट के आधार पर अगर किसी का गलत इलाज होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

🔥मरीजों का आर्थिक और शारीरिक शोषण आखिर कब तक जारी रहेगा?

बस्ती के जागरूक नागरिकों के बीच अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर जिला प्रशासन इस ‘बड़े खेल’ पर अपनी निगाहें कब टेढ़ी करेगा।

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