उत्तर प्रदेशबस्ती

खाकी और खाद्यान्न का गंदा खेल: नाम बदलकर सालों तक सरकारी कोटे की दुकान चलाने वाला जालसाज, अब सफाई कर्मी बनकर उठा रहा सरकारी वेतन।

सप्लाई इंस्पेक्टर का यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि विभाग के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि आखिर आशुतोष लाल इस जालसाज को बचाने के लिए इतने आक्रामक क्यों हैं? क्या आरोपी से उनकी कोई रिश्तेदारी है या फिर इस संरक्षण के पीछे किसी भारी-भरकम लेन-देन का खेल चल रहा है?

अजीत मिश्रा (खोजी)

खाकी और खाद्यान्न का गंदा खेल: नाम बदलकर कोटेदारी खाने वाला बना सफाई कर्मी, DSO और सप्लाई इंस्पेक्टर की शह पर फल-फूल रहा भ्रष्टाचार

  • दो नाम, एक शख्स और फर्जीवाड़ा: ‘भोलू प्रसाद’ बनकर 1998 से 2006 तक किया कोटे का संचालन; फिर ‘शेषराम’ नाम से शैक्षणिक दस्तावेज लगाकर हासिल की सरकारी नौकरी।
  • जांच रिपोर्ट में खुली पोल: अपर जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) अरुण कुमार की जांच (पत्रांक-6402) में पुष्टि— ‘भोलू प्रसाद’ और ‘शेषराम’ निकला एक ही व्यक्ति।
  • DSO विमल कुमार शुक्ला की कार्यशैली पर सवाल: आरोपी जालसाज को बचाने के लिए जांच आख्या देने में आनाकानी करने का गंभीर आरोप।
  • सप्लाई इंस्पेक्टर आशुतोष लाल की खुली चुनौती: विवादित बयान— “चलवा लो खबर, नहीं करूंगा कोई कार्यवाही”; महकमे में रिश्तेदारी और मिलीभगत की चर्चाएं तेज।
  • शिकायतकर्ता की उच्चाधिकारियों से मांग: आरोपी सफाई कर्मी और संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर और कठोर विधिक कार्रवाई की गुहार।

बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। कुदरहा विकास खंड के ग्राम हरैया (मंझारिया) निवासी शिकायतकर्ता विकास कुमार पुत्र संत कुमार द्वारा उजागर किए गए इस फर्जीवाड़े ने सिस्टम के उन काले चेहरों को बेनकाब कर दिया है, जो कानून की आड़ में जालसाजों को संरक्षण दे रहे हैं। मामला एक ऐसे शातिर शख्स से जुड़ा है जिसने नाम बदलकर वर्षों तक सरकारी कोटे का गबन किया और बाद में सरकारी नौकरी हथियाकर जनता के खून-पसीने की कमाई पर डाका डाल रहा है।

​दो नाम, एक शख्स और सरकारी तंत्र की खुली लूट

​शिकायत के मुताबिक, ग्राम पंचायत रैनिया (राजस्व ग्राम सोनघटा) में वर्तमान में सफाई कर्मचारी के पद पर तैनात शेषराम पुत्र राजाराम (निवासी ग्राम कटया पंडित) ने वर्षों तक खाद्य एवं रसद विभाग की आँखों में धूल झोंकी।

  • कोटेदारी का खेल: इस शातिर जालसाज ने अपने पुकार नाम ‘भोलू प्रसाद’ की आड़ लेकर वर्ष 1998 से 17 जुलाई 2006 तक ग्राम पंचायत मंझारिया में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान (राशन कोटे) का अवैध और निर्बाध संचालन किया।
  • नौकरी में पैंतरेबाजी: इसके बाद जब वर्ष 2008 में पंचायती राज विभाग द्वारा सफाई कर्मचारियों की बंपर भर्तियां शुरू हुईं, तो उसने अपनी कोटेदारी के इतिहास को पूरी तरह से छिपा लिया। ‘भोलू प्रसाद’ की पहचान को पीछे धकेलकर उसने अपने मूल और प्रामाणिक नाम ‘शेषराम’ के शैक्षणिक दस्तावेजों के बल पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।

​दो अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर वर्षों तक सरकारी कोटे और सरकारी नौकरी का दोहरा लाभ उठाने का यह खेल किसी बड़ी साजिश से कम नहीं है।

​जांच में खुली पोल, अपर जिला पंचायत राज अधिकारी ने की पुष्टि

​शिकायतकर्ता विकास कुमार द्वारा वर्ष 2026 में दिए गए प्रार्थना पत्रों पर संज्ञान लेते हुए अपर जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) बस्ती, अरुण कुमार द्वारा कराई गई जांच में इस पूरे फर्जीवाड़े की पुष्टि हो चुकी है।

​जांच रिपोर्ट (पत्रांक-6402) के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों के बयान और जिला पूर्ति विभाग की पत्रावली में दर्ज वर्ष 2005 के अनुबंध पत्र के आधार पर यह अकाट्य रूप से साबित हो गया है कि ‘भोलू प्रसाद’ और ‘शेषराम’ कोई और नहीं, बल्कि एक ही व्यक्ति हैं। हालांकि, जांच में शेषराम के शैक्षणिक प्रपत्र सही पाए गए हैं, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि उसने तथ्यों को छिपाकर प्रशासन को अंधेरे में रखा।

​DSO विमल कुमार शुक्ला और सप्लाई इंस्पेक्टर आशुतोष लाल की संदिग्ध भूमिका

​इस गंभीर खुलासे के बाद जिला पूर्ति विभाग (DSO Office) के मुखिया और उनके नुमाइंदों की कार्यशैली पर गंभीर और बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं:

  • बचाव की मुद्रा में DSO: आरोप है कि जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) विमल कुमार शुक्ला मामले में जांच आख्या देने में लगातार आनाकानी कर रहे हैं और आरोपी जालसाज को बचाने की जुगत में लगे हैं।
  • सप्लाई इंस्पेक्टर की खुली चुनौती: मामले में उस समय हद हो गई जब सप्लाई इंस्पेक्टर आशुतोष लाल का एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना और तानाशाही रवैया सामने आया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, आशुतोष लाल ने खुलेआम चुनौती देते हुए कहा— “चलवा लो खबर, मैं नहीं करूंगा कोई कार्यवाही।”

​सप्लाई इंस्पेक्टर का यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि विभाग के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि आखिर आशुतोष लाल इस जालसाज को बचाने के लिए इतने आक्रामक क्यों हैं? क्या आरोपी से उनकी कोई रिश्तेदारी है या फिर इस संरक्षण के पीछे किसी भारी-भरकम लेन-देन का खेल चल रहा है?

​सख्त कार्रवाई की मांग

​शिकायतकर्ता विकास कुमार ने उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर मांग की है कि जांच रिपोर्ट और पूर्ति विभाग के पुख्ता अभिलेखों को आधार बनाकर जालसाज शेषराम उर्फ भोलू प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही, उसे संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों—DSO विमल कुमार शुक्ला और सप्लाई इंस्पेक्टर आशुतोष लाल की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराकर कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।

​इस प्रकरण की प्रतियां अपर आयुक्त (खाद्य, बस्ती मंडल) और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को भी भेजी गई हैं। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इन रसूखदार भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसता है या फिर यह फाइल भी किसी दफ्तर की धूल बनकर रह जाएगी?

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!