A2Z सभी खबर सभी जिले कीTechnologyअन्य खबरे
Trending

आईआईटी रुड़की ने सीमापार जल सहयोग पर 4वें रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया

• नेक्सस-आधारित जल शासन को आगे बढ़ाने हेतु वैश्विक नेतृत्व आईआईटी रुड़की में एकत्रित

आईआईटी रुड़की ने सीमापार जल सहयोग पर 4वें रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया

• नेक्सस-आधारित जल शासन को आगे बढ़ाने हेतु वैश्विक नेतृत्व आईआईटी रुड़की में एकत्रित

• विज्ञान और नीति के माध्यम से सीमापार नदी बेसिन सहयोग को सुदृढ़ करना

• सतत विकास के लिए डेटा, जलवायु सहनशीलता और जल सुरक्षा के बीच सेतु निर्माण

• उच्च-स्तरीय पैनल में सामुदायिक-केन्द्रित जल सहयोग मॉडल पर विशेष बल

रुड़की, उत्तराखंड | 23 फरवरी 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) रुड़की के सहयोग से 23–25 फरवरी 2026 तक “नेक्सस दृष्टिकोण के माध्यम से सीमापार जल सहयोग” विषय पर 4वें रुड़की वाटर कॉन्क्लेव (आरडब्ल्यूसी 2026) का उद्घाटन किया।

यह द्विवार्षिक कॉन्क्लेव विश्वभर के प्रमुख नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के नेताओं और जल विशेषज्ञों को उभरती जल चुनौतियों के एकीकृत एवं सतत समाधान पर विचार-विमर्श हेतु एक मंच प्रदान करता है। प्रमुख विषयगत क्षेत्रों में सीमापार नदी बेसिन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं सहनशीलता, हाइड्रो-मौसमीय चरम घटनाएँ, भूजल स्थिरता, जल गुणवत्ता, तथा जल–ऊर्जा–खाद्य नेक्सस शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने की। डॉ. वाई.आर.एस. राव, निदेशक, एनआईएच रुड़की, कॉन्क्लेव के सह-अध्यक्ष हैं, जबकि प्रो. आशीष पांडे, आईआईटी रुड़की, संयोजक के रूप में कार्य कर रहे हैं।

सत्र का प्रारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन और कुलगीत की प्रस्तुति से हुआ, जिसके पश्चात प्रो. आशीष पांडे द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया गया। प्रो. कमल किशोर पंत; डॉ. वाई.आर.एस. राव; तथा डॉ. मार्क स्मिथ, महानिदेशक, अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्ल्यूएमआई) ने संबोधन दिए। कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित श्री उमाशंकर पांडे, श्री सवजीभाई धोलकिया और श्री पोपटराव पवार के विशेष उद्बोधन, कॉन्क्लेव कार्यवाही का विमोचन, तथा डॉ. विनोद के. पॉल, माननीय सदस्य, नीति आयोग, भारत सरकार का मुख्य व्याख्यान शामिल था। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, “जल सुरक्षा का सीधा संबंध जलवायु सहनशीलता, खाद्य प्रणालियों और ऊर्जा स्थिरता से है, क्योंकि एआई डेटा सेंटरों के बढ़ते उपयोग के कारण जल की मांग में वृद्धि हो रही है। रुड़की वाटर कॉन्क्लेव जैसे मंच साक्ष्य-आधारित संवाद को सक्षम बनाते हैं और सहयोगात्मक तथा विज्ञान-आधारित जल शासन के लिए वैश्विक साझेदारियों को प्रोत्साहित करते हैं।”

प्रो. आशीष पांडे, संयोजक, आरडब्ल्यूसी 2026 ने कहा, “जटिल सीमापार जल चुनौतियों के समाधान के लिए नेक्सस दृष्टिकोण अत्यंत महत्वपूर्ण है। आरडब्ल्यूसी 2026 को वैज्ञानिक अनुसंधान, नीति ढाँचे और सामुदायिक सहभागिता को एकीकृत कर सतत जल प्रबंधन हेतु क्रियाशील मार्ग विकसित करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।”

विभिन्न देशों से कुल 42 मुख्य वक्ता अपने मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे और तकनीकी सत्रों में भाग लेंगे। ये वक्ता संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल, नीदरलैंड, कनाडा, जापान, नॉर्वे, श्रीलंका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और नेपाल सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करेंगे। इन विशिष्ट वक्ताओं की उपस्थिति वैश्विक दृष्टिकोण और वर्तमान जल प्रबंधन चुनौतियों तथा नवाचारी समाधानों पर महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी।

आरडब्ल्यूसी 2026 की एक प्रमुख विशेषता ‘जल सहयोग में सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक-आर्थिक पहलू’ विषय पर आयोजित विशिष्ट पैनल है, जिसमें पद्मश्री सम्मानित श्री सवजीभाई धोलकिया, श्री पोपटराव पवार, श्री भरत भूषण त्यागी और श्री उमाशंकर पांडे सहित वरिष्ठ नीति-निर्माता जैसे श्री राजीव रंजन मिश्रा (पूर्व महानिदेशक, एनएमसीजी), श्री युगल जोशी (कार्यक्रम निदेशक, नीति आयोग), श्री आर. एन. मिश्रा (पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसजेवीएन लिमिटेड), श्री अतुल जैन (उपाध्यक्ष, दीन दयाल शोध संस्थान), तथा प्रो. अनिल के. मिश्रा (तकनीकी विशेषज्ञ, एनआरएए, भारत सरकार) शामिल हैं। यह उच्च-स्तरीय पैनल विज्ञान, नीति और जमीनी नेतृत्व के बीच सेतु स्थापित कर समावेशी, सामुदायिक-प्रेरित और संस्थागत रूप से सुदृढ़ जल शासन ढाँचों को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

कॉन्क्लेव में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख वक्ताओं, विशिष्ट पैनल सदस्यों और तकनीकी विशेषज्ञों की प्रभावशाली श्रृंखला शामिल है, जो प्रतिष्ठित संस्थानों और वैश्विक संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। पूर्ण सत्रों, तकनीकी चर्चाओं और नीति संवादों के माध्यम से आरडब्ल्यूसी 2026 अंतर्विषयी सहयोग को सुदृढ़ करने और सहनशील एवं न्यायसंगत जल संसाधन प्रबंधन ढाँचों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखता है।

आईआईटी रुड़की, भारत का सबसे प्राचीन तकनीकी संस्थान और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान, जल संसाधन और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और नीति सहभागिता को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें: www.iitr.ac.in/rwc

Back to top button
error: Content is protected !!