

🟥🚨 सहारनपुर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के कथित दुर्व्यवहार पर फूटा आक्रोश: आम आदमी से लेकर सम्मानित व्यक्तियों तक के साथ अभद्रता के आरोप, सीएमओ को दी गई औपचारिक सूचना और सख्त चेतावनी — “मरीजों का अपमान अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” 🚨🟥
सहारनपुर: जिला सहारनपुर के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा मरीजों और उनके परिजनों के साथ कथित रूप से किए जा रहे दुर्व्यवहार को लेकर आज गंभीर नाराजगी सामने आई। आरोप है कि अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले आम नागरिकों से लेकर समाज के सम्मानित व्यक्तियों तक के साथ कई बार असंवेदनशील और अभद्र व्यवहार किया जाता है। इन घटनाओं से आहत लोगों ने आज इस मामले को प्रमुखता से उठाते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को औपचारिक रूप से अवगत कराया और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई गईं तो इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बताया गया है कि बीते कुछ समय से सिविल अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को उचित जानकारी न देना, तीखे शब्दों का प्रयोग करना तथा असहयोगात्मक रवैया अपनाने जैसी शिकायतें सामने आ रही थीं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर जहां मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान होता है, वहां यदि उसे सम्मानजनक व्यवहार न मिले तो यह स्थिति और अधिक पीड़ादायक बन जाती है। इसी मुद्दे को लेकर आज अधिवक्ताओं एवं अन्य सामाजिक साथियों का एक प्रतिनिधिमंडल एकत्र हुआ और स्वास्थ्य विभाग को इस विषय में गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सरकारी अस्पताल जनता की सेवा के लिए होते हैं और यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का हकदार है। यदि किसी डॉक्टर या स्टाफ द्वारा जानबूझकर दुर्व्यवहार किया जाता है तो उसके खिलाफ स्पष्ट अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यह भी मांग की गई कि अस्पताल परिसर में शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि पीड़ित व्यक्ति अपनी बात निर्भीकता से रख सके।
सीएमओ को दी गई सूचना में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि भविष्य में किसी भी मरीज या तीमारदार के साथ अभद्र व्यवहार की घटना सामने आती है तो संबंधित पक्ष द्वारा व्यापक स्तर पर आंदोलन या विरोध दर्ज कराया जाएगा। उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि मरीजों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अधिवक्ता गण एवं अन्य साथी मौजूद रहे और उन्होंने एक स्वर में अस्पताल प्रशासन को चेताया कि व्यवस्था में सुधार आवश्यक है। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों की जांच कर क्या ठोस कदम उठाता है।
संपादक – एलिक सिंह
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