उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊ

दो दिन का ‘प्रशिक्षण’ भी नहीं पिघला पाया नेताओं का ‘अहंकार’, एक टेबल पर बैठने से कतराए भाजपा के दिग्गज!

जिला अध्यक्ष बोले- 'संगठन ही सबसे बड़ी ताकत', जानकार बोले- 'अपनों की गुटबाजी ही सबसे बड़ा संकट'।

अजीत मिश्रा (खोजी)

अंदर ‘समीक्षा’ का ढोंग, बाहर अंतर्कलह का ‘दंगल’: गुटों में बंटी बस्ती भाजपा, क्या अपनों की ही गुटबाजी में डूबेगी हरैया सीट?

– विशेष खोजी रिपोर्ट (बस्ती ब्यूरो)

  • अंदर ‘अनुशासन’ का राग, बाहर अंतर्कलह का ‘दंगल’: गुटों में बंटी बस्ती भाजपा, कैसे बचेगी हरैया की साख? बंद कमरे में पीठ थपथपाते रहे नेता, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने खोली कथित ‘एकता’ की पोल; ‘हाय-हेलो’ तक से परहेज।
  • ’27 के चुनाव’ से पहले आत्मघाती मोड़ पर बस्ती भाजपा: अगर नहीं थमी ‘खेमेबाजी’, तो किसी और की झोली में जाएगी हरैया सीट। पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और दिग्गजों के बीच खिंची ‘सियासी दीवार’; कार्यकर्ताओं में मायूसी।
  • कागजी समीक्षा में ‘पास’, धरातल के अनुशासन में ‘फेल’: भाजपा के ‘प्रशिक्षण वर्ग’ पर गुटबाजी का ‘बोलबाला’! कमेटियों और व्यवस्था प्रमुखों की लंबी सूची के बीच खो गई जमीनी एकजुटता, आपसी रंजिश चरम पर।
  • सवाल हरैया की जनता का: आपस में नजरें चुराने वाले नेता, साथ मिलकर कैसे लड़ेंगे 2027 की जंग? नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की वेदी पर चढ़ता संगठन; बस्ती भाजपा के अंतर्विरोधों का एक्सरे।

बस्ती। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) खुद को दुनिया की सबसे अनुशासित और ‘काडर-बेस्ड’ राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अक्सर मंचों से हुंकार भरता है कि उनके यहाँ व्यक्ति नहीं, बल्कि ‘संगठन’ सर्वोपरि है। लेकिन उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से जो तस्वीरें और खबरें छनकर आ रही हैं, वे भाजपा के इस कथित ‘अनुशाही’ चोगे को तार-तार करने के लिए काफी हैं।

​मामला बस्ती जिला भाजपा द्वारा आयोजित ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला प्रशिक्षण वर्ग’ के समापन के बाद आयोजित की गई समीक्षा बैठक का है। विक्रमजोत होटल के सभागार में कोर कमेटी, प्रशिक्षण वर्ग संचालन और व्यवस्था समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में जिला अध्यक्ष विवेकानंद मिश्र ने मंच से बड़ी-बड़ी बातें करते हुए कहा, “संगठन की मजबूती ही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है।” लेकिन हकीकत यह है कि इस बंद कमरे के भीतर जितनी शिद्दत से ‘अनुशासन’ का राग अलापा जा रहा था, ठीक उसी वक्त कमरे के बाहर सोशल मीडिया पर भाजपा के ही दिग्गजों की आपसी ‘अहंकार की लड़ाई’ और गुटबाजी का नंगा नाच चल रहा था।

​मंच पर पीठ थपथपाई, ‘कागजी’ सफलता पर बंटे सर्टिफिकेट

​बैठक की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र ने की। मुख्य अतिथि और प्रमुख रणनीतिकारों के रूप में वर्ग प्रभारी व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक में इस दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग की व्यवस्थाओं, संगठनात्मक गतिविधियों तथा आगामी राजनीतिक अभियानों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

​डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिला प्रशिक्षण वर्ग की सफलता सभी समितियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के समर्पण, अनुशासन और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का संगठन कार्यकर्ताओं की निष्ठा और वैचारिक प्रतिबद्धता से मजबूत होता है और यह प्रशिक्षण वर्ग इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

​बैठक में जिला कोर कमेटी के सदस्य व जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र, विधायक अजय सिंह, पूर्व विधायक दयाराम चौधरी, संजय जायसवाल, चंद्रप्रकाश शुक्ल, रवि सोनकर, राजेश पाल चौधरी, अमृत कुमार वर्मा एवं अभिषेक कुमार उपस्थित रहे।

​वाहवाही की लूट: इन नेताओं के कार्यों की हुई सराहना

​समीक्षा बैठक के दौरान ‘कागजी’ अनुशासन के तहत कई नेताओं की पीठ थपथपाई गई। प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से कार्यकर्ताओं को वैचारिक, सामाजिक और संगठनात्मक रूप से सशक्त बनाने का दावा किया गया, ताकि वे सरकार की योजनाओं और पार्टी की नीतियों को प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुंचा सकें।

  • ​प्रशिक्षण वर्ग संचालन समिति के प्रमुख दिव्य प्रकाश, नियंत्रक सत्येंद्र सिंह ‘भोलू’, सह-नियंत्रक राधेश्याम कमलापुरी, कार्यक्रम प्रमुख अमृत कुमार वर्मा, व्यवस्था प्रमुख देवेन्द्र सिंह, अखंड प्रताप सिंह, प्रेम प्रकाश चौधरी, अजय पाल सिंह, प्रत्युष विक्रम सिंह, चन्द्र शेखर ‘मुन्ना’ एवं शालिनी मिश्रा के कार्यों की विशेष सराहना की गई।
  • ​इसके अतिरिक्त, सर्व व्यवस्था प्रमुख प्रमोद कुमार चौधरी ‘गिल्लम’, भोजन प्रमुख सुनील सिंह, आवास प्रमुख राजकुमार शुक्ल, मंच व्यवस्था प्रमुख विनय सिंह भारद्वाज, साज-सज्जा प्रमुख अभिषेक कुमार गौतम, प्रदर्शनी प्रमुख गौरव अग्रवाल, स्वच्छता प्रमुख विद्यामणि सिंह, पंजीकरण प्रमुख दिलीप पाण्डेय, तकनीकी प्रमुख सुरेन्द्र चौधरी, यातायात प्रमुख वीरेन्द्र गौतम, सुरक्षा प्रमुख ब्रह्मदेव यादव ‘देवा’, अतिथि प्रमुख भानु प्रकाश मिश्र एवं मोबाइल पार्किंग प्रमुख दिव्यांश दुबे के योगदान की भी जमकर प्रशंसा की गई।

​सोशल मीडिया पर फूटा गुटबाजी का ‘बम’, खुली एकता की पोल

​कमरे के भीतर तो प्रशंसाओं के पुल बांधे जा रहे थे, लेकिन कमरे के बाहर का नजारा कुछ और ही था। सोशल मीडिया पर जिस तरह से भोजन से लेकर चायपान और आपसी चर्चा की तस्वीरें वायरल हुईं, उसने भाजपा के इस भव्य आयोजन के पीछे छिपी गुटबाजी को पूरी तरह उजागर कर दिया।

​शिविर में कार्यकर्ताओं को ‘एकता’ का पाठ पढ़ाया जा रहा था, लेकिन नेताओं के बीच केवल और केवल खेमेबाजी दिखी। सबसे अधिक पूर्व सांसद के ‘गोल’ यानी उनके खास गुट के लोगों की तस्वीरें वायरल हुईं। पूर्व सांसद के समर्थकों का अपना अलग ही खेमा बना हुआ था, जो बाकी पार्टी कार्यकर्ताओं से दूरी बनाए हुए था।

​’हाय-हेलो’ तक से परहेज: जब एक मेज पर बैठने से कतराए दिग्गज

​बस्ती भाजपा की आंतरिक दरार उस वक्त पूरी तरह सार्वजनिक हो गई, जब राजकिशोर सिंह के साथ पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तैरने लगीं। इसे देखकर राजनीतिक गलियारों में साफ संदेश गया कि यहाँ पार्टी दो या तीन टुकड़ों में बंट चुकी है।

​हद तो तब देखने को मिली जब पूर्व सांसद, साथ में पूर्व विधायक अजय सिंह और राजकिशोर सिंह जैसे दिग्गज नेता पूरे दो दिन के प्रशिक्षण शिविर में एक साथ नहीं दिखे। राजनीतिक हलकों में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि:

​”अगर इन नेताओं के दिल साफ हैं, तो दो दिन के बड़े आयोजन में भी ये तीनों नेता एक टेबल पर बैठकर भोजन करते या हंसी-मजाक करते हुए क्यों नहीं दिखे? ऐसी एक भी तस्वीर वायरल क्यों नहीं हुई जो कार्यकर्ताओं को सकारात्मक संदेश दे सके?”

 

​जब बड़े नेता आपस में ‘हाय-हेलो’ तक करने से कतरा रहे हों, तो यह साफ है कि बस्ती भाजपा में गुटबाजी इस समय अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

​खतरे में ‘हरैया’ की सीट: ’27 के चुनाव’ से पहले आत्मघाती मोड़ पर भाजपा

​मीडिया बार-बार इस कड़वे सच से भाजपा नेतृत्व को रूबरू कराता आ रहा है कि अंतर्कलह से किसी भी राजनीतिक दल का भला नहीं होता, बल्कि सिर्फ और सिर्फ नुकसान होता है। ऐसा नहीं है कि इस बात का एहसास पार्टी के स्थानीय नेताओं या जमीनी कार्यकर्ताओं को नहीं है; वे खुद इस सिरफुटौव्वल से बेहद मायूस और सहमे हुए हैं।

​राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि यदि ’27 के विधानसभा चुनाव’ से पहले बस्ती भाजपा ने अपनी इस आंतरिक गुटबाजी को समाप्त नहीं किया, तो आगामी चुनाव में पार्टी को इसका बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

  • हरैया विधानसभा सीट पर सबसे बड़ा संकट: वर्तमान में हरैया विधानसभा सीट को बचाए रखना भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अगर पार्टी को इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना है, तो सबसे पहले नेताओं के इन ‘निजी गोल’ और ‘गुटों’ को खत्म करना होगा।
  • विपक्ष को वॉकओवर की तैयारी: अगर आपसी खींचतान यूं ही चलती रही, तो कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा। ऐसे में हरैया की सीट भाजपा के हाथ से फिसलकर किसी और (विपक्ष) की झोली में चली जाएगी।

बड़ा सवाल: आखिर आपस में नजरें चुराने वाले और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की फिराक में बैठे ये रसूखदार नेता हरैया की जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या वे अपनी व्यक्तिगत रंजिश और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए पार्टी की लुटिया डुबोने को तैयार हैं? जिला अध्यक्ष के ‘मजबूत संगठन’ वाले बयान और धरातल की इस ‘कमजोर हकीकत’ के बीच का यह फासला आने वाले दिनों में भाजपा को बेहद भारी पड़ने वाला है।

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