उत्तर प्रदेशगोंडागोरखपुरबस्तीलखनऊसिद्धार्थनगर 

गोंडा: नशा माफिया पर बड़ा प्रहार, 12 लाख की कोडीन सिरप के साथ एक का भंडाफोड़

गायत्री फार्मा की आड़ में चल रहा था 'नशे का खेल', 19 हजार शीशियां बरामद; मालिक फरार गोंडा में कोडीन सिरप का काला कारोबार बेनकाब, बिना बोर्ड वाले कोरियर सेंटर पर छापा

अजीत मिश्रा (खोजी)

गोंडा: कोडीन सिरप के ‘काला कारोबार’ का भंडाफोड़, नोएडा से मंगाई गई 19 हजार से अधिक शीशियां जब्त

ब्यूरो रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश | गोंडा

  • गोंडा में 12.46 लाख की अवैध कोडीन सिरप जब्त, फार्मा की बिक्री पर लगी रोक
  • ड्रग्स विभाग की बड़ी कार्रवाई: 19,790 कोडीन सिरप की बोतलें बरामद
  • नोएडा से गोंडा पहुंची नशे की खेप, पुलिस के हत्थे चढ़ते-चढ़ते बचा दवा माफिया
  • दवा के नाम पर परोसा जा रहा था ‘नशा’, गोंडा में भारी मात्रा में प्रतिबंधित सिरप बरामद
  • गोंडा का ‘नशा कनेक्शन’: नोएडा से मंगाई गई कोडीन सिरप की बड़ी खेप जब्त
  • पुलिस-ड्रग विभाग की छापेमारी से मचा हड़कंप, आर्यनगर की फार्मा फर्म के खिलाफ कार्रवाई

​गोंडा जनपद में नशे के सौदागरों के खिलाफ ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध रूप से लाई गई कोडीन युक्त सिरप की एक बड़ी खेप बरामद की है। इस कार्रवाई ने दवा व्यवसाय की आड़ में चल रहे नशे के नेटवर्क की परतों को उधेड़ कर रख दिया है। बरामद सिरप की कीमत 12,46,770 रुपये बताई जा रही है, जो सीधे तौर पर युवाओं को नशे की लत में धकेलने के लिए मंगाई गई थी।

क्या है पूरा मामला?

​शनिवार देर रात, गोंडा के महादेवा क्रॉसिंग के पास स्थित एक संदिग्ध कोरियर सेंटर पर ड्रग इंस्पेक्टर सुमित वर्मा और नगर कोतवाली पुलिस ने संयुक्त छापेमारी की। सूचना मिली थी कि नोएडा के सेक्टर-58 स्थित ‘लीलाबको रेमेडीज प्राइवेट लिमिटेड’ से भारी मात्रा में नशीली दवाओं की खेप पहुंची है। मौके पर पहुंची टीम ने जांच की तो वहां 132 पेटियां मिलीं, जिनमें ‘ALTOREX CD’ ब्रांड के कोडीन सिरप की 19,790 शीशियां भरी हुई थीं।

गायत्री फार्मा की भूमिका और मालिक की संलिप्तता

​जांच में यह बात सामने आई कि यह पूरा ऑर्डर आर्यनगर स्थित ‘गायत्री फार्मा’ के नाम से बुक किया गया था। कार्रवाई के दौरान फर्म का मालिक सुधाकर दुबे मौके पर ही मौजूद था, लेकिन जैसे ही उसे अधिकारियों के आने की भनक लगी, वह चकमा देकर फरार हो गया। ड्रग विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए ‘फॉर्म-15’ के तहत कठोर कार्रवाई शुरू की है। विभाग ने नोटिस जारी कर फर्म से इन दवाओं की खरीद और बिक्री का पूरा ब्यौरा तलब किया है। जब तक फर्म अपना पक्ष नहीं रखती, तब तक उसकी समस्त व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

बिना नाम का कोरियर सेंटर: जांच के दायरे में कई सवाल

​इस मामले ने कोरियर कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सेंटर पर यह खेप उतारी गई, वह बिना किसी आधिकारिक बोर्ड के चल रहा था और इसका संचालन कानपुर का एक व्यक्ति कर रहा था। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सेंटर सिर्फ इस अवैध कारोबार के लिए ही इस्तेमाल किया जा रहा था? विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस खेप की डिलीवरी लेने के लिए और कौन-कौन लोग शामिल थे।

चिकित्सीय उपयोग बनाम नशे का ‘कॉकटेल’

​ड्रग इंस्पेक्टर सुमित वर्मा ने मीडिया को बताया कि कोडीन युक्त सिरप का उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर की सलाह पर ही किया जा सकता है। खुले बाजार में इसकी बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा, “दवा की आड़ में इसे युवाओं तक पहुंचाकर समाज में नशे का जहर घोला जा रहा है। हमने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है कि आखिर ये सिरप बाजार में किन-किन माध्यमों से खपाई जानी थी।”

आगे की राह: क्या होगा अगला कदम?

​यह बरामदगी महज एक शुरुआत हो सकती है। विभाग अब इन पहलुओं पर काम कर रहा है:

  • सप्लाई चेन की जांच: यह दवा किन-किन अन्य जिलों या स्थानीय विक्रेताओं को भेजी जानी थी?
  • फार्मा फर्म की जवाबदेही: क्या गायत्री फार्मा के पास इस बड़ी खेप को मंगाने का वैध लाइसेंस था, या यह कागजों में हेरफेर करके किया गया अवैध खेल था?
  • सख्त कानूनी कार्रवाई: यदि फर्म संतोषजनक उत्तर नहीं देती है, तो न केवल उसका लाइसेंस रद्द होगा, बल्कि एनडीपीएस एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया जा सकता है।

​फिलहाल, ड्रग विभाग ने जब्त की गई दवाओं को स्थानीय कोरियर सेंटर के मालिक की सुपुर्दगी में सुरक्षा के साथ रखवाया है। सुधाकर दुबे की तलाश में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। इस कार्रवाई के बाद से गोंडा के दवा बाजार में हड़कंप है और कई उन दुकानदारों के चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई हैं जो डॉक्टर के पर्चे के बिना भी दवाएं उपलब्ध कराने के लिए बदनाम हैं।

इस मामले में नियमों का उल्लंघन क्यों माना जा रहा है?

गोंडा के मामले में अधिकारियों को संदेह है क्योंकि:

  • भारी मात्रा में स्टॉक: 19,790 शीशियों का एक साथ ऑर्डर करना एक सामान्य मेडिकल स्टोर की आवश्यकता से बहुत अधिक है।
  • संदिग्ध डिलीवरी पॉइंट: किसी बोर्ड-विहीन कोरियर सेंटर पर डिलीवरी लेना यह दर्शाता है कि मालिक इसे रिकॉर्ड में नहीं दिखाना चाहता था।
  • अनियमितता: यदि गायत्री फार्मा के मालिक सुधाकर दुबे के पास इन दवाओं की बिक्री का ठोस रिकॉर्ड (डॉक्टर के पर्चे) नहीं है, तो यह ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट’ की धारा 18(C) का उल्लंघन है।

निष्कर्ष: यदि जांच में यह पाया जाता है कि फर्म के पास पर्याप्त खरीद बिल और बिक्री रिकॉर्ड नहीं है, तो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि कोडीन का उपयोग नशे के उद्देश्य से वितरण के लिए पाया जाता है, तो मामला NDPS एक्ट में स्थानांतरित हो सकता है, जहाँ कठोर कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!