
आत्महत्या रोकने के लिए जागरूकता-शिवानी जैनएडवोकेट 
ऑल ह्यूमन सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन डिस्टिक वूमेन चीफ शिवानी जैन एडवोकेट ने कहा कि
इस विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर, हम सभी को यह दिखाना चाहते हैं कि आत्महत्या के विचारों सहित कठिन भावनाओं के बारे में बात करना डरावना नहीं है।
एक सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल 45% लोग ही आत्महत्या के विचारों के बारे में परिवार और मित्रों से बात करने में सहज महसूस करते हैं, जबकि 74% लोग मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करने में सहज महसूस करते हैं।हम इसे बदलना चाहते हैं। आत्महत्या के बारे में ज़्यादा खुलकर बात करके, हम लोगों को यह बताने का मौक़ा दे सकते हैं कि वे कैसा महसूस करते हैं और उन्हें ज़रूरी सहायता मिल सकती है। इससे किसी की जान भी बच सकती है।
थिंक मानवाधिकार संगठन एडवाइजरी बोर्ड मेंबर एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार डॉ कंचन जैन ने कहा कि हर साल 10 सितम्बर को दुनिया भर के संगठन और समुदाय इस बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एकत्रित होते हैं कि हम किस प्रकार मिलकर एक ऐसा विश्व बना सकते हैं, जहां आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या कम हो।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस हम सभी के लिए एक साथ आने, जागरूकता बढ़ाने और आत्महत्या को रोकने और उन लोगों का समर्थन करने की दिशा में सार्थक कदम उठाने का अवसर है जो इससे निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, संरक्षक आलोक मित्तल एडवोकेट, ज्ञानेंद्र चौधरी एडवोकेट, डॉ आरके शर्मा, निदेशक डॉक्टर नरेंद्र चौधरी, शार्क फाउंडेशन की तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन, बीना एडवोकेट, मीरा एडवोकेट आदि ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि आत्महत्या एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है, जिसके कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 10 लाख मौतें होती हैं। अनुमान है कि वर्तमान में दुनिया भर में हर साल सात लाख से ज़्यादा आत्महत्याएँ होती हैं, और इसका असर बहुत ज़्यादा लोगों पर पड़ रहा है। इसके अलावा, यह 15 और 29 वर्ष की आयु के लोगों की मृत्यु का चौथा सबसे बड़ा कारण है।
शिवानी जैन एडवोकेट
डिस्ट्रिक्ट वूमेन चीफ







