
नवरात्रि के नौ दिनों मे देवी मां दुर्गाजी की पूजा सेवा का बहुत महत्व होता है। अधिकतर लोग पूजा के समय मे कलश की स्थापना करते है। ज्वारे उगाते है। श्री दुर्गा महानवमी पर कन्यापूजन तथा हवन पूजन के पश्चात नवरात्र का इतिश्री होता है। नवरात्र के पश्चात अधिकतर लोग पूजा कलश मे रखे हुए नारियल को फोड़कर प्रसाद स्वरूप मे अपने परिवार मे बांटकर खा लेते है। परंतु ऐसा करना सर्वथा अनुचित होता है। आइये जानते है कि पूजा कलश मे रखा नारियल का पूजा के बाद क्या करना चाहिए। पूजा कलश मे नारियल यानी श्रीफल का अपना एक महत्व होता है। कलश के ऊपर नारियल रखा जाता है, उस नारियल को कलावे से लपेटकर देवी दुर्गा जी की मूर्ति की स्थापना की जाती है। नवरात्र के पूरे नौ दिन दुर्गा जी के साथ साथ इस कलश की भी पूजा वंदना की जाती है। मान्यतानुसार इस नालियल को खाना नही चाहिए। विद्वानों का मानना है कि कलश मे रखा हुआ नारियल दुख कष्टो बाधाओं का विनाश करता है। इसलिए कलश पर रखा हुआ नारियल को खाना नही चाहिए। कलश मे रखे हुए नारियल को कुछ लोग नदी या बहते हुए जल मे प्रवाहित कर देते है। बुरी नजर से बचने के लिए, घर मे शुभता लाने के लिए कलश मे रखे नारियल को किसी साफ लाल वस्त्र मे लपेटकर घर के मुख्य द्वार पर बांध देना चाहिए। ऐसा करने पर घर मे आने वाली सभी प्रकार की नकरात्मक शक्तियों का विनाश होता है। कलश मे रखे हुए नारियल को लाल वस्त्र मे लपेटकर घर मे भी रखा जा सकता है। इससे घर मे सुख शांति समृद्धि बना रहता है।
