









Tigri Mela 2024 – फोटो : संवादतिगरीधाम में कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर श्रद्धालुओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए गंगा तट पर दीपदान किया। इससे घाट का माहौल गमगीन हो गया। महाभारत के समय से चली आ रही इस परंपरा में श्रद्धालु अपने प्रियजनों को याद कर तर्पण करते हैं।Tigri Mela 2024 – फोटो : संवाद
कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार शाम श्रद्धालुओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दीपदान किया। जिससे तिगरी का गंगा तट जगमगा उठे। गंगा किनारे ऐसा प्रतीत होने लगा मानों आसमान में टिमटिमाने वाले तारे जमीन पर उतर आएं हों। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा।हमेशा के लिए दूर जा चुके अपनों के लिए दीपदान करते ही लोगों की आंखें नम हो गईं। इसके चलते घाटों का माहौल गमगीन हो गया। वहीं, कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्थान शुक्रवार को होगा। इसके बाद श्रद्धालु घर वापस लौटने लगेंगे।
Tigri Mela: Remembered loved ones by lighting lamps, main bathing tomorrow in Tigri Mela… see the fair in piतिगरीधाम पर गंगा किनारे लगे ऐतिहासिक मेले की 11 नवंबर को विधिवत शुरुआत हुई थी, जिसका शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा पर मुख्य स्नान के साथ समापन होगा। हालांकि, पिछले कई दिनों से लोग गंगा किनारे तंबू बनाकर रह रहे है। जिससे में गंगा किनारे तंबुओं का शहर बस गया है।
पिछले कई दिनों से गंगा किनारे पड़ाव डालकर रह रहे श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक आयोजन करने के साथ गंगा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। मेले का सबसे अहम पर्व चतुर्दशी को मनाया जाता है, जिसमें लोग सालभर में अपने मृतक अपने परिजनों की आत्मा की शांति के लिए गंगा में दीपदान करते हैं।बृहस्पतिवार शाम सूर्यास्त होते ही तिगरी गंगा घाट पर श्रद्धालु दीपदान के लिए पहुंच गए। नम आंखों से अपने पूर्वजों के लिए दीपदान किया। यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा। अपने सगे संबंधी और परिजनों से बिछड़े लोगों को याद कर लोगों की आंखें भर आईं।इस परंपरा को निभाते वक्त गंगा घाट आसमान में तारों जैसा दिखाई देने लगा। कुछ श्रद्धालु तिगरी गंगा घाट पहुंच पाए। इसके बाद दीपदान किया। दीपदान के बाद पुरोहितों को वस्त्र, अन्न एवं दक्षिणा आदि का दान भी कियादीपदान का महत्व
मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था। तब से यह परंपरा चल रही है।कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी धाम लगने वाले ऐतिहासिक मेले के मुख्य स्नान से एक दिन चतुर्दशी पर अपने पितरों का तर्पण करते हैं। यह दीपदान वही लोग करते हैं, जिनके सगे संबंधी एक वर्ष के अंदर उन्हें छोड़कर परम पिता परमेश्वर की शरण में चले गए हैं। गंगा में दीपदान करने से मृत आत्माओं को शांति मिलती है।गंगा की रेती में मस्ती कर रहे युवा
तिगरीधाम विभिन्न संस्कृतियों का संगम है। मेले में कई संस्कृतियों के लोग आकर गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं। कोई हवन कराता है तो किसी ने रोजाना खिचड़ी का प्रसाद वितरण कर श्रद्धालुओं का पेट भरने का संकल्प लिया। कहीं पर साधु संत अपनी तपस्या में लीन हैं।वहीं, युवाओं के निराले अंदाज हैं। कोई ट्रैक्टर को मोडिफाई कर उसे दौड़ाने में लगा है, तो कुछ युवक ताश खेलने में लगे रहते हैं। युवाओं का बड़ा वर्ग स्नान कर गंगा की रेती में मस्ती करने और कबड्डी खेलने में लग जाते है।मीना बाजार में महिलाओं ने की जमकर खरीदारी
तिगरी में कार्तिक पूर्णिमा लगे गंगा मेले में मीना बाजार और मनोरंजन क्षेत्र में दिन भर चहल पहल रहती है। मीना बाजार में महिलाएं दिनभर खरीदारी करती हैं। देर रात तक बाजार महिलाओं से भरा रहता है। बृहस्पतिवार रात तक मीना बाजार महिलाओं से गुलजार रहाबच्चों ने लिया चांट-पकौड़ी का आनंद
मेले में परिवारों के साथ आए बच्चों के इस समय आनंद आ रहे हैं। वह दिन निकलते ही परिजनों के साथ गंगा में स्नान कर खाने-पीने की वस्तुओं की तरफ रुख कर देते हैं। चांट-पकौड़ी के साथ ही आईसक्रीम का आनंद ले रहे हैं। झूल, नाव आदि पर मनोरंजन करते हैं। स्नान कर बच्चों का मुंडन संस्कार कराया
तिगरी गंगा मेले में श्रद्धालुओं ने बृहस्पतिवार तड़के पतित पावनी गंगा में स्नान कर पुण्य कमाया। इसके बाद धार्मिक अनुष्ठान कराए गए। वहीं, दंपतियों द्वारा बच्चों का मुंडन संस्कार कराया गया। इस दौरान परिवार की महिलाओं ने मंगल गीत गाए। गंगा मेले में बच्चों का मुंडन संस्कार करने वाले नाइयों की मौज रही। उन्होंने श्रद्धालुओं से अच्छी खासी रकम वसूल की।मौ दीन पत्रकार रिपोर्टर भोजपुर जिला मुरादाबाद











