
मानवाधिकारों का महत्व सभी व्यक्तियों की गरिमा, स्वतंत्रता और समानता को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा करने में निहित – शिवानी जैन एडवोकेट

ऑल ह्यूमन सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन और कमेटी मेंबर शिवानी जैन एडवोकेट ने विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर कहा कि इसकी पहली बैठक जनवरी 1947 में हुई और मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के लिए एक मसौदा समिति की स्थापना की गई, जिसे 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाया गया। यह निकाय दो अलग-अलग चरणों से गुजरा।
थिंक मानवाधिकार संगठन की एडवाइजरी बोर्ड मेंबर एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार डॉ कंचन जैन ने कहा कि मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं की एक विस्तृत श्रृंखला निर्धारित की गई है, जिसके हम सभी हकदार हैं। यह राष्ट्रीयता, निवास स्थान, लिंग, राष्ट्रीय या जातीय मूल, धर्म, भाषा या किसी अन्य स्थिति के आधार पर भेदभाव किए बिना हर व्यक्ति के अधिकारों की गारंटी देता है।
मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, आलोक मित्र एडवोकेट, ज्ञानेंद्र चौधरी एडवोकेट, बृजेश शुक्ला एडवोकेट, डॉ आरके शर्मा, निदेशक डॉक्टर नरेंद्र चौधरी, शार्क फाउंडेशन की तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन, बीना एडवोकेट आदि ने कहा कि
दुनिया भर में हर साल 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। यह वह दिन है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया था। यह घोषणा दुनिया भर के इतिहास में एक मील का पत्थर है क्योंकि इसमें सभी लोगों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं, चाहे उनकी पृष्ठभूमि मानवाधिकारों का महत्व सभी व्यक्तियों की गरिमा, स्वतंत्रता और समानता को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा करने में निहित है, चाहे कुछ भी हो।





