A2Z सभी खबर सभी जिले की
Trending

खबर है कि देश की सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर यूपी सरकार के "पत्रकारों को मुकदमें से डरवाओ" वाली नीति को फटकार लगाई है. कोर्ट ने यूपी पुलिस विभाग के मुखिया (डीजीपी) को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर आईपीसी की धारा 420 कैसे और क्यों लगाई है. यह पूरा प्रकरण पत्रकार ममता त्रिपाठी से जुड़ा हुआ है.

खबर है कि देश की सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर यूपी सरकार के "पत्रकारों को मुकदमें से डरवाओ" वाली नीति को फटकार लगाई है. कोर्ट ने यूपी पुलिस विभाग के मुखिया (डीजीपी) को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर आईपीसी की धारा 420 कैसे और क्यों लगाई है. यह पूरा प्रकरण पत्रकार ममता त्रिपाठी से जुड़ा हुआ है.

खबर है कि देश की सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर यूपी सरकार के “पत्रकारों को मुकदमें से डरवाओ” वाली नीति को फटकार लगाई है. कोर्ट ने यूपी पुलिस विभाग के मुखिया (डीजीपी) को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर आईपीसी की धारा 420 कैसे और क्यों लगाई है. यह पूरा प्रकरण पत्रकार ममता त्रिपाठी से जुड़ा हुआ है.IMG 20250405 062316सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर स्टोरी लिखने पर कोई किसी पत्रकार के खिलाफ धारा 420 कैसे दर्ज कर दी गई. आज सुप्रीम कोर्ट में पत्रकार ममता त्रिपाठी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्दार्थ दवे खड़े थे. स्टेट को रिप्रेजेंट कर रहे विद्वान अधिवक्ताओं ने अपने तर्क से दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाए. स्टोरी करने पर एफआईआर झेल रहे ममता त्रिपाठी के मामले में यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने जमकर क्लास लगाई है.संज्ञेय अपराध बनाने के लिए जोड़ा धारा 420

 

पत्रकार ममता त्रिपाठी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्दार्थ दवे ने कोर्ट से कहा कि चूंकि मानहानि का मामला संज्ञेय अपराध नहीं है, इसलिए उसे संज्ञेय अपराध बनाने के लिए धारा 420 जोड़ी गई. आज बहस का पूरा मुद्दा एफआईआर में धारा 420 जोड़ने को लेकर थीसुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से बेहद कड़े सवाल पूछे और साथ ही सरकार व डीजीपी को नोटिस जारी कर दिया. ममता त्रिपाठी पर सितम्बर 2023 में लखनऊ के हज़रतगंज थाने में एफआईआर हुई थी. पिछले तीन महीने से राज्य सरकार “जवाब दाखिल” करने के नाम पर लगातार कोर्ट से समय ले रही थी.

[yop_poll id="10"]
Show More
Back to top button
error: Content is protected !!