
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्ट

पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य पर थप्पड़ मारने वाले आरोपी रोहित द्विवेदी को जमानत पर रिहा कर दिया गया है। रिहाई के तुरंत बाद, समाजसेवी आशीष तिवारी अपने समर्थकों के साथ रोहित के गांव पहुंचे और उसे 11 लाख रुपये का चेक भेंट किया।
घटना बीते बुधवार की है, जब स्वामी प्रसाद मौर्य लखनऊ से फतेहपुर जा रहे थे। रायबरेली के सारस तिराहे पर स्वागत के दौरान रोहित ने पहले मौर्य को माला पहनाई और फिर पीछे से थप्पड़ मार दिया। मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने आरोपी को पकड़कर पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने रोहित द्विवेदी और शिवम यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
हमले के बारे में रोहित का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने सनातन धर्म पर अभद्र टिप्पणी की और रामचरितमानस को फाड़ा, जिससे वह आहत हुआ और इस गुस्से में उसने थप्पड़ मार दिया। शनिवार को जमानत मिलने के बाद उसे समाजसेवी से आर्थिक सहयोग मिलने की खबर अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय है।
ठीक है — मैं आपको इस घटना का संभावित राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी असर एक-एक करके विस्तार से बताता हूँ, ताकि पूरी तस्वीर साफ हो जाए।
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1. राजनीतिक असर
राजनीतिक ध्रुवीकरण – स्वामी प्रसाद मौर्य पहले भी धार्मिक टिप्पणियों के कारण विवादों में रहे हैं, इसलिए यह घटना उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच विभाजन को और गहरा कर सकती है।
विपक्ष बनाम सत्ता – विरोधी दल इस घटना को “जन आक्रोश” का उदाहरण बताकर इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि सत्ता पक्ष कानून-व्यवस्था पर सवालों से बचने की कोशिश करेगा।
लोकल लेवल पर प्रभाव – रायबरेली जैसी राजनीतिक रूप से संवेदनशील जगह पर ऐसी घटना आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
प्रतीकात्मक राजनीति – 11 लाख का चेक देने जैसी कार्रवाई को कुछ लोग “नायक बनाने” की कोशिश मानेंगे, तो कुछ इसे “कानून तोड़ने वालों को महिमामंडित करने” के रूप में देखेंगे।
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2. सामाजिक असर
धार्मिक संवेदनशीलता – सनातन धर्म और रामचरितमानस जैसे मुद्दों से जुड़ी घटनाएं बहुत जल्दी सामाजिक तनाव पैदा करती हैं।
जन भावना का उबाल – किसी धर्म पर की गई टिप्पणी का जवाब लोग अपने तरीके से देने लगते हैं, जिससे भीड़ मानसिकता और “तत्काल न्याय” का माहौल बन सकता है।
सोशल मीडिया ध्रुवीकरण – सोशल प्लेटफॉर्म पर यह घटना दो शिविरों में बहस और ट्रोलिंग को बढ़ाएगी।
हिंसा का सामान्यीकरण – अगर किसी पर हमला करने वाले को “इनाम” या “सम्मान” मिलता है, तो यह संदेश जा सकता है कि हिंसा भी स्वीकार्य है, बशर्ते वह “धार्मिक भावनाओं” के नाम पर हो।
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3. कानूनी असर
हमला और मारपीट के केस – रोहित द्विवेदी और शिवम यादव पर IPC की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। जमानत मिलने के बावजूद केस जारी रहेगा।
प्रेरित हिंसा की रोकथाम – अगर ऐसे मामलों में कठोर सजा नहीं होती, तो भविष्य में और लोग धार्मिक या राजनीतिक आधार पर हिंसा करने को “वैध” मान सकते हैं।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका – घटना के समय सुरक्षा में कमी, और बाद में गिरफ्तारी व रिहाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं।
इनाम देने की वैधता – 11 लाख का चेक देने की कार्रवाई कानूनी रूप से सीधे अपराध नहीं है, लेकिन यह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और अपराधी को प्रोत्साहन देने के रूप में देखी जा सकती है।





