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सिद्धार्थनगर जेल में शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा

आत्मबोधन सदन बना बंदियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

सोमवार को जिला कारागार सिद्धार्थनगर में एक अत्यंत पावन और ऐतिहासिक आयोजन सम्पन्न हुआ। आत्मबोधन सदन (बैरक) में पवित्र शिवलिंग की भव्य स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा अत्यंत श्रद्धा, मर्यादा और दिव्यता के साथ की गई। यह महत्वपूर्ण अनुष्ठान अधीक्षक श्री सचिन वर्मा के कर कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। उन्होंने पूरे कारागार परिवार व बंदी समुदाय के कल्याण, मानसिक शांति और जीवन परिवर्तन के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की।

आत्मबोधन सदन वह स्थान है जहाँ बंदियों की प्रारंभिक व्यवस्था की जाती है और यहीं से उनके सुधारात्मक, आध्यात्मिक और अनुशासनात्मक जीवन की यात्रा शुरू होती है। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए शिवलिंग की स्थापना यहीं की गई, ताकि यह स्थान बंदियों के लिए केवल ठहरने का स्थल नहीं, बल्कि मनन, आत्मचिंतन, सकारात्मकता और नई शुरुआत का केंद्र बन सके। यह स्थापना आत्मबोधन सदन के वास्तविक उद्देश्य – ‘आत्मिक जागृति और जीवन परिवर्तन’ – को और मजबूत करती है।

पूरे परिसर में दिव्य वातावरण

प्रातःकाल से ही कारागार परिसर भक्ति और दिव्यता में डूबा नजर आया। आत्मबोधन सदन को पारंपरिक ढंग से सजाया गया था। शंखनाद, “ॐ नमः शिवाय” के जाप, वैदिक ऋचाओं और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। वैदिक विधि-विधान से गणेश वंदना, रुद्राभिषेक, पंचामृत स्नान, दुग्ध-अभिषेक, पुष्पार्चन और मंत्रोच्चारण के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक किया गया।

अधीक्षक, जेलर और डिप्टी जेलर ने किया अभिषेक

अधीक्षक श्री सचिन वर्मा, जेलर मुकेश प्रकाश तथा डिप्टी जेलर अजीत चंद ने स्वयं अभिषेक कर भगवान शिव से सभी बंदियों के आत्मबल, अनुशासन, मानसिक कल्याण और जीवन परिवर्तन की कामना की। उन्होंने कहा कि शिवलिंग की यह स्थापना केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुधार और सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और नई शुरुआत देने का केन्द्र है।

बंदीगण की अनुशासित सहभागिता

बंदीगण ने सजावट, सफाई, व्यवस्था, जल संसाधन, मंच निर्माण और भजन-कीर्तन में स्वैच्छिक और अनुशासित भागीदारी निभाई। भजन-कीर्तन के दौरान बंदियों की भक्ति से पूरा वातावरण और भी पवित्र हो गया। कई बंदियों ने बताया कि ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों से उन्हें मानसिक राहत, तनाव से मुक्ति और जीवन के प्रति नई आशा मिलती है।

सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण

प्राण-प्रतिष्ठा के बाद सामूहिक आरती आयोजित हुई, जिसमें “हर हर महादेव” और “जय शिव शंकर” की गूंज से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। इसके बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया और कारागार परिसर में सौहार्द, भाईचारा और आत्मीयता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रेरक कदम

शिवलिंग स्थापना मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे बंदियों के मन में सकारात्मक विचार, आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन और भविष्य के प्रति नई दिशा उत्पन्न होगी। यह कार्यक्रम सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगी।

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