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बंगाल–झारखंड के 44 ठिकानों पर छापेमारी, 14 करोड़ जब्त

ईडी की बड़ी कार्रवाई: एल बी सिंह, अनिल गोयल, संजय खेमा, अमर मंडल, नरेंद्र खड़का, कृष्णा मुरारी कायल समेत नेटवर्क पर शिकंजा बंगाल–झारखंड के 44 ठिकानों पर छापेमारी, 14 करोड़ जब्त

डायरेक्टोरेट ऑफ़ एन्फ़ोर्समेंट (ED) ने 21 नवंबर 2025 को पश्चिम बंगाल और झारखंड में 44 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई अवैध कोयला खनन, चोरी, तस्करी और अवैध परिवहन से जुड़े एक बड़े सिंडिकेट की जांच के तहत की गई। यह जांच मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) 2002 के अंतर्गत जारी है।

इस अभियान के दौरान ईडी ने 14 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, सोने और गहनों की बड़ी मात्रा, कई डिजिटल उपकरण, जमीन संबंधी दस्तावेज, कंपनियों की अकाउंट बुक्स और अन्य आपत्तिजनक रिकॉर्ड बरामद किए। दस्तावेजों में अवैध कोयला व्यापार, फर्जी लेनदेन और धन शोधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रमाण मिले।

झारखंड के 20 ठिकाने – धनबाद और दुमका में छापेमारी

झारखंड में ईडी ने जिन 20 परिसरों पर जांच की, वे मुख्य रूप से निम्नलिखित लोगों व उनकी कंपनियों, सहयोगियों और संस्थाओं से जुड़े हैं:

लाल बहादुर सिंह
अनिल गोयल
संजय खेमा
अमर मंडल

इन ठिकानों से कोयला सिंडिकेट के संचालन, जमीन खरीद-बिक्री के सौदों, बैंकिंग ट्रेल और नकद प्रवाह से जुड़े अहम दस्तावेज मिले।

पश्चिम बंगाल के 24 ठिकाने – दुर्गापुर, पुरुलिया, हावड़ा और कोलकाता

पश्चिम बंगाल में छापेमारी आवासीय परिसरों, कार्यालयों, अवैध टोल कलेक्शन प्वाइंट और कोक प्लांट्स पर की गई, जो निम्नलिखित व्यक्तियों और संगठनों से जुड़े हैं:

नरेंद्र खड़का
कृष्णा मुरारी कायल
युधिष्ठिर घोष
राज किशोर यादव
लोकेश सिंह
चिन्मय मंडल
नीरद बारन मंडल

इन ठिकानों से ईडी को अवैध वसूली की डायरी, तस्करी मार्गों का विवरण, डिजिटल रिकॉर्ड और कोयला परिवहन से जुड़े फर्जी दस्तावेज मिले।

FIRs ने खोला कोयला तस्करी का बड़ा नेटवर्क

पश्चिम बंगाल और झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज FIRs के आधार पर ईडी की जांच में यह सामने आया कि झारखंड से बंगाल तक बिना वैध दस्तावेजों के कोयले की सप्लाई की जा रही थी। FIRs के आरोपों की पुष्टि ईडी को मिले दस्तावेजों और डिजिटल डेटा से हुई।

जांच में सामने आया कि:

* सीमावर्ती इलाकों में एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था
* स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई
* अवैध कमाई को छुपाने के लिए फर्जी कंपनियों का उपयोग किया गया
* लाखों की रोजाना नकद वसूली होती थी, जिसके लाभार्थियों की सूची भी मिली

इस कार्रवाई में 100 से अधिक ईडी अधिकारी और CRPF के जवान शामिल थे।

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