उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊ

।। फर्जी मान्यता प्राप्त पत्रकार यूपी रोडवेज व भारतीय रेलवे को बड़ी चतुराई से चूना लगा रहे।।

।। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के कार्ड की नकल कर हूबहू दूसरा कार्ड तैयार हो रहा।।

।। बस्ती में बड़ी चतुराई से सरकार को चूना लगा रहे हैं फर्जी मान्यता प्राप्त पत्रकार।।

06 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश।

बस्ती ।। जिले में फर्जी मान्यता प्राप्त पत्रकार यूपी रोडवेज व भारतीय रेलवे को बड़ी चतुराई से चूना लगा रहे हैं। विभाग के जिम्मेदार जानबूझकर ऐसे पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही नही कर रहे हैं या फिर वे पत्रकारों का सम्मान बंचा रहे हैं। जानकारी मिल रही है कि मान्यता प्राप्त पत्रकारों के कार्ड की नकल कर हूबहू दूसरा कार्ड तैयार हो रहा है, इस पर अपनी फोटो पेस्ट कर पत्रकार सरकारी सुविधायें ऐंठ रहे हैं। 

अजीत मिश्रा (खोजी)

जिसका काम ऐसे मामलों को उजागर कर समाज के सामने लाना है वे खुद ऐसा आदर्श गढ़ रहे हैं कि आने वाले समय मे पत्रकारों पर कोई यकीन नही करेगा और उन्हे भी भ्रष्ट व असभ्य समाज का हिस्सा समझेगा। यूपी रोडवेज के बस्ती स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार राजेन्द्र उपाध्याय नाम का कथित पत्रकार आज बस्ती रोडवेज की बस में गोरखपुर की तरफ जाने के लिये सवार हुआ। इस बस की कंडक्टर एक महिला थी। राजेन्द्र ने खुद को मान्यता प्राप्त पत्रकार बताया तो महिला कंडक्टर ने उनका कार्ड मांगकर मोबाइल में फोटो खींच लिया और विभाग के ग्रुप में डाल दिया। 

कई लोगों ने ग्रुप में लिखना शुरू कर दिया अरे ये तो फर्जी पत्रकार है। महिला राजेन्द्र उपाध्याय पर लीगल एक्शन लेने के लिये पुलिस बुलाती इससे पहले पत्रकार ने मौसम का मिजाज भांप लिया और बस से नीचे उतर गया। यह घटना पहली बार नही हुई है। राजेन्द्र उपाध्याय को इससे पहले डुमरियागंज रोड पर सरकारी बस में पकड़ा गया था, किन्तु कंडक्टर उनके मान्यता वाले कार्ड की जांच करता इससे पहले वे बस से उतर गये। फिलहाल बस्ती रोडवेज ने राजेन्द्र उपाध्याय को सबक सिखाने का मन बना लिया है। एक जिम्मेदार अधिकारी ने कहा कि दोबारा किसी बस में इन्होने मान्यता प्राप्त पत्रकार की सुविधा लेने का प्रयास किया तो सीधे एफआईआर कराया जायेगा।

💫 कौन हैं राजेन्द्र उपाध्याय—

राजेन्द्र उपाध्याय खुद को दैनिक स्वतंत्र चेतना का जिला संवाददाता बताते हैं। इनके कार्ड का नम्बर बीएसटी-164 है जो दिसम्बर 2025 तक के लिये वैध है। इस पर सूचना निदेशक की दस्तखत और मुहर है। बताया गया कि राजेन्द्र उपाध्याय कप्तानगंज के रहने वाले हैं। जानकारी मिलने के बाद दैनिक स्वतंत्र चेतना के जिला संवाददाता देवेन्द्र कुमार पाण्डेय से बात की गई तो उन्होने कहा उपाध्याय पूरी तरह से फर्जी हैं वे खुद जिला संवाददाता है, दूसरा जिला संवाददाता कहां से आ गया। आप समझ सकते हैं कि राजेन्द्र उपाध्याय जैसे लोगों के चलते ही पत्रकारिता जैसा पवित्र पेशा बदनाम हो रहा है और अच्छी छबि के पत्रकारों को भी शर्मसार होना पड़ रहा है।

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