उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊसिद्धार्थनगर 

बस्ती।।‌ कहीं 96 लाख का घोटाला, तो कहीं 15 हजार महिलाओं का हक मरा जा रहा है।।

क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों पर चलने के लिए हैं? क्या मासूमों की मौत का हिसाब होगा?

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। सिस्टम को ‘इलाज’ की दरकार: सरकारी फाइलों में योजनाएं, हकीकत में मातम।।

विशेष रिपोर्ट

बस्ती उत्तर प्रदेश ।। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों का बजट पानी की तरह बहा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह पैसा जरूरतमंदों की ‘जान’ बचाने के बजाय भ्रष्ट तंत्र की ‘जेब’ भरने के काम आ रहा है। [स्थान] में स्वास्थ्य विभाग का हाल ऐसा है कि यहाँ योजनाएं खुद बीमार पड़ गई हैं।

एक मां की गोद सूनी, सिस्टम बेपरवाह

मरवटिया गाँव की एक महिला की व्यथा हमारे सिस्टम की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा प्रमाण है। नसबंदी फेल होने के बाद उसने पाँच बच्चों को जन्म दिया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और निगरानी के अभाव में एक-एक कर सभी पाँच नवजात काल के गाल में समा गए। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और विभाग कागजों पर रिपोर्ट दबाकर बैठा रहे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?

‘मातृ वंदना’ में भ्रष्टाचार का घुन

रुपईडीह ब्लॉक में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 96 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। फर्जी लाभार्थियों के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई लूटी जा रही है। ताज्जुब की बात यह है कि एक महीना बीत जाने के बाद भी जांच कमेटी की रिपोर्ट ठंडे बस्ते में है। क्या विभाग दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है?

🙊बजट का रोना और लंबित भुगतान

🔥जननी सुरक्षा योजना (JSY) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जिले में 15,028 प्रसूताओं का भुगतान सिर्फ इसलिए अटका हुआ है क्योंकि विभाग के पास ‘बजट नहीं है’।

🔥JSY का सच: 20,591 आवेदनों में से केवल 5,563 महिलाओं को लाभ मिला।

🔥अल्ट्रासाउंड सेवा ठप: सितंबर से निजी केंद्रों पर मिलने वाली मुफ्त अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद पड़ी है।

🙊सवाल जो जवाब मांगते हैं:

🙈क्या आला अधिकारियों को भ्रष्टाचार की इस दीमक की जानकारी नहीं है?

🙈गरीबों के हक का पैसा कब तक कागजी घोड़ों और फर्जी बैंक खातों की भेंट चढ़ता रहेगा?

🙈क्या उन पाँच मासूमों की मौत का जिम्मेदार कोई अधिकारी या कर्मचारी सलाखों के पीछे जाएगा?

स्वास्थ्य विभाग में सुविधाओं का अंबार तो है, लेकिन नियत में खोट है। जब तक सिस्टम में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ‘स्वस्थ भारत’ का सपना सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित रहेगा। जनता अब खोखले आश्वासनों से ऊब चुकी है, उसे समाधान चाहिए।

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