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छत्तीसगढ़ जिला सूरजपुर

*जनहित की खबर बनी विवाद की वजह, निजी चैनल के पत्रकार को धमकी* *पुलिस जांच में जुटी, शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को थमाया नोटिस*

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भैयाथान: जनहित में समाचार प्रकाशित करना एक निजी चैनल के पत्रकार को उस समय भारी पड़ गया, जब समाचार से नाराज़ एक व्यक्ति ने पत्रकार को जान से मारने की धमकी दे दी। मामला सूरजपुर जिले के भैयाथान थाना क्षेत्र का है, जहाँ पीड़ित पत्रकार ने समस्त पत्रकार साथियों की उपस्थिति में थाना पहुँचकर एफआईआर दर्ज कराने हेतु लिखित आवेदन सौंपा। मामले ने तूल पकड़ने के बाद अब पुलिस प्रशासन और शिक्षा विभाग—दोनों स्तरों पर कार्रवाई शुरू हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस) को आंगनबाड़ी केंद्र झिलमिली (ब) में राष्ट्रीय ध्वज का ध्वजारोहण नहीं होने की सूचना स्थानीय लोगों द्वारा दी गई थी। सूचना के आधार पर एक निजी चैनल के पत्रकार ने मौके पर पहुँचकर स्थिति की पड़ताल की और तथ्यों के आधार पर जनहितकारी समाचार का प्रकाशन किया। यह समाचार पूरी तरह पत्रकारिता के दायित्वों और सामाजिक सरोकारों के अनुरूप था।

समाचार प्रकाशित होने के अगले दिन 27 जनवरी 2026 को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पुत्र गौतम यादव द्वारा पत्रकार के पास पहुँचकर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गाली-गलौच की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। इस घटना से पत्रकार न केवल मानसिक रूप से आहत हुए, बल्कि उन्हें और उनके परिवार को जान-माल की गंभीर आशंका भी उत्पन्न हो गई।

घटना के बाद पीड़ित पत्रकार ने समस्त पत्रकारों की उपस्थिति में थाना भैयाथान पहुँचकर लिखित आवेदन दिया और आरोपी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। आवेदन के साथ धमकी से संबंधित वीडियो क्लिप भी साक्ष्य के रूप में संलग्न की गई है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी भैयाथान नसीमुद्दीन अंसारी ने बताया कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के उपरांत जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

इधर, पत्रकार की शिकायत के आधार पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी, भैयाथान ने भी प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए आरोपी गौतम कुमार यादव, शिक्षक (माध्यमिक शाला झिलमिली) को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि शिक्षक का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम (3) का उल्लंघन प्रतीत होता है। संबंधित शिक्षक को दो दिवस के भीतर स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले भर के पत्रकारों में रोष के साथ-साथ यह स्पष्ट संदेश भी गया है कि पत्रकारों को धमकाने और डराने के मामलों को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा। प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर हुई यह कार्रवाई न केवल एक मामले तक सीमित है, बल्कि इसे स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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