

जिलासंवाददाता प्रमोद गुप्ता कीरिपोर्ट
छोटी काशी गोला गोकर्ण नाथ।
जंगलों में बरसात के मौसम में जमीन के अंदर पाए जाने वाली वन्य पशुओं का आहार एवं वन विभाग द्वारा प्रतिबंधित वन्य पशु आहार कटरुआ एवं धरती का फूल जो कि जंगली जीव सुअर एवं हिरण आदि का चारा है और जंगलों के अंदर जमीन के अंदर पाया जाता है। हालांकि वन विभाग द्वारा वन क्षेत्र में प्रवेश भी बिना वन विभाग की अनुमति से आमजन के लिए प्रतिबंधित है फिर आखिरकार कैसे जंगलों के अंदर मिलों दूर से इस वन्य पशु आहार को खोदकर दूर दराज की बाजारों तक पहुंचाया जाता है।
क्या इस तरह की गतिविधियों पर वन विभाग के अधिकारी आँखें मूंदे बैठे हैं क्यों कटरुआ और धरती के फूल की कीमत गोला की खुटार रोड सब्जी मंडी जो अतिक्रमण कर रोड पर लगती है वहां इसे 1000 से लगाकर 2000 रुपए किलो तक फुटकर विक्रेताओं द्वारा बेचा जाता है।
थोक विक्रेता आढ़ती जो कि पुरानी सब्जी के नाले पर अतिक्रमण कर दुकानें बनाए हुए हैं वहां पर बाहरी व्यापारी जो इस प्रतिबंधित वन्य जीव पशु आहार को बेचने आते उनसे खरीदकर खुदरा विक्रेताओं को बेचते हैं और खुदरा व्यापारी इस कटरुआ पर कीचड़ और काली मिट्टी का लेप लगाकर वजन दोगुना कर तौलते हैं और मंहगे दामों में बेचते हैं।
आखिर वन विभाग के अधिकारी इस तरह की गतिविधियों पर क्यों चुप्पी साधे बैठे हैं या फिर क्या इस तरह की गतिविधियों को उनको सम्पूर्ण जानकारी है और अत्यधिक महंगी और साल में बरसात के मौसम में सिर्फ एक या दो महीने प्राप्त होने वाली इस प्राकृतिक वन्य पशु आहार की निकासी और बिक्री में उनकी भी मिलीभगत है।
वैसे तो वन क्षेत्र में प्रवेश वर्जित है अगर कोई हिंसक जंगली पशु के द्वारा इन कटरुआ और धरती के फूल खोदने वालों के साथ जंगल में कोई हादसा हो जाती है तो आखिर उसका जिम्मेदार कौन होगा?




