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गुरु महिमा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का मूल आधार है:- मुकेश बाबा

कथा के दौरान ओजस्वी कथाकार अश्विन यदुवंशी भी शामिल हुए

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बांगरदा (खरगोन) गुरु महिमा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का मूल आधार है। जो अज्ञानता के अंधकार को मिटा कर ज्ञान के ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है। गुरु शिष्य को न केवल सांसारिक शिक्षा देते हैं, बल्कि आत्मा को जागृत कर जीवन को सही दिशा दिखाते हैं।
उक्त विचार व्यक्त करते हुए संगीतमय सिंगाजी परचरी पुराण कथा के चौथे दिन व्यास पीठ से मुकेश बाबा ने कहा कि सिंगाजी हमेशा अपने गुरु को सर्वोपरि मानते थे। विषम परिस्थितियों आने पर एवं लोक कल्याणकारियों में गुरु को सर्वोपरि मानकर चमत्कारिक कार्य करते थे। मुकेश बाबा ने कहा कि गुरु निस्वार्थ भाव से शिष्य को वासनाओं से ऊपर उठाकर भक्ति एवं सत्य के मार्ग पर ले जाते हैं। एवं गुरु की अनुकंपा एवं महिमा का पूर्ण लाभ पाने के लिए शिष्य में समर्पण एवं श्रद्धा की भावना आवश्यक है। सिंगाजी अपने जीवन काल में अपने गुरु के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहकर उनके प्रति पूर्ण श्रद्धा रखकर लोक कल्याण करते थे। कथा के दौरान ओजस्वी कथाकार अश्विन यदुवंशी ने व्यासपीठ का पूजन कर मुकेश बाबा का स्वागत किया। मुख्य यजमान राधेश्याम करोड़ा,रमेश करोड़ा, हुकुमचंद चौधरी, सुरेश करोड़ा ने अतिथि कथाकार अश्विन यदुवंशी का साल एवं श्रीफल से सम्मान किया। कथा के दौरान निमाड़ी शैली में संगीतमय निमाड़ी भजनों की प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। अंत में महा आरती में सैकड़ो महिला पुरुषों ने भाग लिया। एवं प्रसादी का वितरण किया गया।
:-रामेश्वर फूलकर पत्रकार बांगरदा

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