
12 फरवरी की हड़ताल को लेकर केडीएच व रोहिणी परियोजना में संयुक्त मोर्चा की गेट मीटिंग।।
रिपोर्टर/राशीद अंसारी
खलारी। 12 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के उद्देश्य से रविवार को एनके एरिया अंतर्गत केडीएच एवं रोहिणी परियोजना में संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। केडीएच परियोजना में आयोजित गेट मीटिंग की अध्यक्षता सभी ट्रेड यूनियनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से की, जबकि संचालन गोल्डन प्रसाद यादव ने किया। वहीं रोहिणी परियोजना में गेट मीटिंग की अध्यक्षता अमृत भोक्ता ने की तथा संचालन ध्वजा राम धोबी ने किया।
गेट मीटिंग को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड को मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह से पूंजीपतियों के हित में बनाया गया है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि लेबर कोड लागू होने से मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने के अधिकार समाप्त हो जाएंगे और वे अपनी मांगों को लेकर हड़ताल भी नहीं कर सकेंगे।
वक्ताओं ने कहा कि लेबर कोड लागू होने के बाद कोयला मजदूरों का 12वां वेतन समझौता संभव नहीं हो पाएगा। साथ ही जेबीसीसीआई, जेसीएससी एवं एसीसी जैसी महत्वपूर्ण समितियां भी समाप्त हो जाएंगी। जमीन के बदले नौकरी की व्यवस्था खत्म हो जाएगी तथा 9.3.0 के तहत मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति भी बंद कर दी जाएगी। मेडिकल अनफिट के बदले नौकरी की व्यवस्था पहले ही समाप्त की जा चुकी है, जिससे मजदूर परिवारों को भारी क्षति हुई है।
वक्ताओं ने आगे कहा कि लेबर कोड लागू होने के बाद किसी भी प्रकार के कल्याणकारी कार्य संभव नहीं रहेंगे। स्थायी नौकरी की जगह 3 से 4 वर्षों के लिए फिक्स टर्म अपॉइंटमेंट दिया जाएगा। काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिए जाएंगे तथा 60 वर्ष तक की नौकरी की सुरक्षा भी समाप्त हो जाएगी।
संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने मजदूर संगठनों की सहमति के बिना मनमाने तरीके से मजदूर विरोधी लेबर कोड लागू करने की कोशिश की है। इसके विरोध में पूरे देश के मजदूर 12 फरवरी को हड़ताल पर जा रहे हैं। वक्ताओं ने कोयला मजदूरों से एकजुट होकर हड़ताल को शत-प्रतिशत सफल बनाने की अपील की।
गेट मीटिंग में मुख्य रूप से प्रेम कुमार, गोल्डन यादव, शैलेश कुमार, सुनील कुमार सिंह, रतिया गंझू, रंथू उरांव, रमेश कुमार सिंह, देवपाल मुंडा, दिनेश भर, अजय चौहान, जी.के. साहू, अरविंद कुमार, राम लखन गंझू, मोहन पांडे, नंदू मेहता, सुरेश साव, नरेश प्रसाद, रामा उरांव, प्रधान मुंडा, बीरन पासवान एवं रुपलाल गंझू ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर दोनों परियोजनाओं के सैकड़ों मजदूर उपस्थित थे।



