
विजय कुमार बंसल ब्यूरो चीफ हरिद्वार 
श्री राम कथा प्रेम यज्ञ का अत्यंत दिव्य, भव्य और आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ,
ज्वालापुर स्थित गगन पैलेस में अपने परम पूज्य पिता स्वर्गीय श्री शिव कुमार कंसल जी की पावन स्मृति, दिव्य प्रेरणा और उनके आदर्श जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने के पवित्र संकल्प के साथ उनके सुपुत्र श्री दर्पण कंसल एवं मयंक कंसल तथा धर्मपत्नी श्रीमती मंजू कंसल जी द्वारा श्री राम कथा प्रेम यज्ञ का अत्यंत दिव्य, भव्य और आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसने सम्पूर्ण वातावरण को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि पिता के प्रति कृतज्ञता, संस्कारों की परंपरा और परिवार की आस्था का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। देश के प्रख्यात कथा व्यास श्री हनुमान दास जी महाराज के श्रीमुख से प्रस्फुटित श्रीराम कथा का अमृतमय प्रवाह जब आरंभ हुआ तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं अयोध्या की पावन स्मृतियाँ उस स्थल पर अवतरित हो गई हों। महाराज जी ने श्रीराम के जीवन चरित्र का ऐसा मार्मिक, ओजस्वी और भावपूर्ण वर्णन किया कि उपस्थित श्रद्धालु कभी हर्ष से पुलकित हुए, कभी करुणा से द्रवित हुए और कभी आत्मचिंतन में लीन हो गए। कथा के प्रत्येक प्रसंग—चाहे वह श्रीराम जन्मोत्सव का उल्लास हो, वनवास का त्याग हो, केवट प्रसंग की विनम्रता हो या भरत मिलाप का अद्वितीय भ्रातृ प्रेम—सबने श्रोताओं के अंतर्मन को झकझोर दिया। एक अत्यंत सुंदर दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए महाराज जी ने कहा कि जैसे सूर्य उदित होते ही अंधकार स्वतः दूर हो जाता है, उसी प्रकार श्रीराम कथा का श्रवण करते ही मनुष्य के जीवन का अज्ञान, मोह और विकार नष्ट हो जाते हैं; जैसे गंगा में स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है, वैसे ही रामनाम और रामकथा के श्रवण से आत्मा निर्मल हो जाती है। उन्होंने समझाया कि मनुष्य का जीवन एक नाव के समान है, संसार सागर के समान और श्रीराम का नाम उस नाव की पतवार के समान है, जो जीवन को सही दिशा देता है; यदि पतवार सुदृढ़ हो तो तूफान भी मार्ग नहीं रोक सकता। इस पावन आयोजन में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का रसपान किया, भजन-कीर्तन से पूरा गगन पैलेस श्रीराममय हो उठा और वातावरण में ‘सीताराम’ के उद्घोष गूंजते रहे। सुसज्जित पंडाल, पुष्पों की सुगंध, दीपों की ज्योति और भक्तों की भावभीनी उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को एक अलौकिक आयाम प्रदान किया। श्री शिव कुमार कंसल जी के जीवन के आदर्श—सादगी, सेवा, धर्मनिष्ठा और परोपकार—इस आयोजन के माध्यम से सजीव हो उठे और यह अनुभूति हुई कि सच्चे संस्कार कभी समाप्त नहीं होते, वे पीढ़ी दर पीढ़ी प्रवाहित होते रहते हैं। परिवार द्वारा आयोजित यह श्री राम कथा प्रेम यज्ञ नगरवासियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बना और सभी के हृदय में धर्म, मर्यादा, प्रेम और सदाचार की ज्योति प्रज्वलित कर गया। यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि एक संदेश भी था कि जब परिवार अपने पूर्वजों के आदर्शों को जीवन में उतारता है, तब वही परिवार समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र बन जाता है, और वास्तव में यही किसी भी पुण्यात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होती है।





