बस्ती के ‘चौधरी जी ढाबा’ में सेहत से खिलवाड़: चकाचौंध के पीछे ‘ज़हर’ परोसने का आरोप, कमिश्नर तक पहुंची शिकायत!
बिना फायर सेफ्टी और मानकों के चल रहा VIP इलाके का ढाबा; रामवृक्ष की शिकायत के बाद क्या लगेगा ताला?
अजीत मिश्रा (खोजी)
⛱️प्रशासन की नाक के नीचे ‘ज़हर’ परोस रहा चौधरी जी ढाबा? कमिश्नर से शिकायत, ताला लगना तय⛱️
⭐चौधरी जी ढाबा: स्वाद के नाम पर ‘मौत’ का सामान? अग्निशमन मानकों की धज्जियां उड़ाने पर घिरे संचालक।
⭐कमिश्नर की चौखट पर ‘चौधरी जी ढाबा’ के काले कारनामे, अब रसूखदारों पर भारी पड़ेगी जाँच!
⭐बस्ती प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा था असुरक्षित खेल, शिकायती पत्र से खुली ढाबे की पोल।
⭐खाद्य सुरक्षा और फायर विभाग की रडार पर ‘चौधरी जी फैमिली रेस्टोरेंट’, क्या सीज होगा प्रतिष्ठान?
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बस्ती। जनपद के वीआईपी इलाकों में शुमार पटेल चौक पर स्थित ‘चौधरी जी फैमिली रेस्टोरेंट एण्ड ढाबा’ इन दिनों अपनी चकाचौंध के पीछे छिपी भारी अनियमितताओं को लेकर विवादों के घेरे में है। ग्राहकों की सेहत और सुरक्षा को ताक पर रखकर संचालित हो रहे इस प्रतिष्ठान के खिलाफ अब बड़कुइयाँ निवासी रामवृक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मण्डलायुक्त (कमिश्नर) को शिकायती पत्र भेजकर ढाबे के काले कारनामों की उच्चस्तरीय जाँच और सख्त कार्यवाही की माँग की है।
💫खतरे में जान: न सुरक्षा के इंतजाम, न खाने का मयार
शिकायती पत्र में लगाए गए आरोप न सिर्फ गंभीर हैं, बल्कि चौंकाने वाले भी हैं। रामवृक्ष का दावा है कि:
💫अग्निशमन मानकों की अनदेखी: ढाबा बिना पर्याप्त फायर सेफ्टी एनओसी और उपकरणों के चल रहा है, जिससे यहाँ आने वाले परिवारों पर हर वक्त बड़ा खतरा मंडराता रहता है।
💫सड़ा-गला और मिलावटी भोजन: आरोप है कि मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों को मानक विहीन और दूषित खाद्य सामग्रियां परोसी जा रही हैं। यह सीधे तौर पर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है।
💫आर्थिक शोषण: बेहतर सुविधा के नाम पर ग्राहकों से मनमानी कीमत वसूल कर उनकी ‘जेब पर कैंची’ चलाई जा रही है।
क्या प्रशासन कसेगा शिकंजा?
बस्ती के प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि अगर मण्डलायुक्त के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग और अग्निशमन विभाग ने निष्पक्ष जाँच की, तो ढाबे की असलियत सामने आ जाएगी। सूत्र बताते हैं कि मानकों में इतनी भारी कमी है कि निष्पक्ष जाँच की सूरत में इस ढाबे पर ताला लगना लगभग तय माना जा रहा है।
“जनहित में इस तरह के असुरक्षित और मिलावटखोर प्रतिष्ठानों पर लगाम कसना बेहद जरूरी है। प्रशासन को चाहिए कि वह रसूखदारों के दबाव में न आकर निष्पक्ष कार्यवाही करे।”— रामवृक्ष (शिकायतकर्ता)
















