

बलौदाबाजार, 27 फरवरी 2026।
डिजिटल युग में बढ़ते मोबाइल उपयोग के बीच जागरूकता की अलख जगाने का सराहनीय प्रयास करते हुए एक्स्ट्राआर्डिनरी स्कूल के छात्रों ने स्थानीय क्षेत्र में एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया। नाटक का मुख्य उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि मोबाइल तकनीक जीवन को सरल बनाने का साधन है, लेकिन उसका दुरुपयोग हमें अपनों से दूर और समस्याओं के करीब ले जा सकता है।
दमदार अभिनय, गूंजता संदेश
छात्रों ने अपने सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद और जीवंत प्रस्तुति के माध्यम से मोबाइल के दुष्प्रभावों को बेहद मार्मिक ढंग से दर्शाया। नाटक के विभिन्न दृश्यों में समाज के उन पहलुओं को उभारा गया, जो आज हर घर की हकीकत बन चुके हैं—
डिजिटल दूरी:
एक ही घर में रहते हुए भी परिवार के सदस्य मोबाइल स्क्रीन में खोए रहते हैं। नाटक में दिखाया गया कि कैसे संवादहीनता रिश्तों में खामोश दूरी पैदा कर रही है।
शिक्षा पर प्रभाव:
गेमिंग और सोशल मीडिया की लत विद्यार्थियों की एकाग्रता और अध्ययन क्षमता को प्रभावित कर रही है। छात्रों ने यह दर्शाया कि कैसे मोबाइल का अत्यधिक उपयोग भविष्य की दिशा बदल सकता है।
स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं:
अत्यधिक स्क्रीन टाइम से आँखों पर दुष्प्रभाव, मानसिक तनाव, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
दर्शकों ने की खुलकर सराहना
नुक्कड़ नाटक देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, अभिभावक और युवा उपस्थित रहे। बच्चों की प्रस्तुति ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
एक अभिभावक ने भावुक होकर कहा,
“आज जब छोटे बच्चे भी मोबाइल के बिना खाना नहीं खाते, ऐसे में इन छात्रों का यह संदेश वास्तव में समाज के लिए आँख खोलने वाला है।”
विद्यालय प्रशासन का प्रेरक संदेश
विद्यालय की प्राचार्या डॉ. एकता शुक्ला ने छात्रों के उत्साह और सामाजिक जागरूकता की भावना की सराहना करते हुए कहा,
“हमारा उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित शिक्षा देना नहीं, बल्कि बच्चों को जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना है। मोबाइल तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जन के लिए होना चाहिए, न कि समय नष्ट करने के लिए।”
कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय के डायरेक्टर श्री अभिषेक तिवारी एवं श्री टूकेश्वर वर्मा का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग उल्लेखनीय रहा। उन्होंने बच्चों में बढ़ते डिजिटल दुष्प्रभावों को कम करने की दिशा में इस पहल को अत्यंत आवश्यक बताया।
शिक्षकों का सराहनीय योगदान
एक शिक्षक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा,
“हमारा कार्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें वैचारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी अवगत कराना है।”
इस सामाजिक संदेश को सफल बनाने में आकांक्षा मैम, सपना मैम, काजल मैम, लता मैम, सुशील सर, वैष्णो सर, हरीश सर सहित अन्य शिक्षकों का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा।
डिजिटल अनुशासन की शपथ
नाटक के समापन पर सभी छात्रों एवं उपस्थित नागरिकों ने “डिजिटल अनुशासन” बनाए रखने और मोबाइल का सीमित, सकारात्मक एवं सार्थक उपयोग करने की शपथ ली।
यह नुक्कड़ नाटक केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं था, बल्कि समाज को जागरूक करने की एक सशक्त पहल थी—जिसने यह स्पष्ट संदेश दिया कि
मोबाइल जीवन का साधन बने, जीवन का शत्रु नहीं।












