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बारात बनकर पहुंची आयकर टीम, बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर 25 घंटे चला सघन तलाशी अभियान

लखनऊ/बलिया। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए आयकर विभाग ने बेहद अनोखी रणनीति अपनाई। अधिकारी सरकारी वाहनों की बजाय शादी की बारात में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों में सवार होकर पहुंचे, जिससे किसी को भी शक न हो।
शादी के सीजन का लाभ उठाते हुए वाहनों पर विवाह समारोह से जुड़े स्टीकर लगाए गए थे। इस कारण स्थानीय लोगों को यह सामान्य बारात लगी और किसी को अंदेशा तक नहीं हुआ कि यह आयकर विभाग की टीम है। इसी रणनीति के चलते अधिकारी बिना किसी बाधा के सीधे विधायक के आवास और कार्यालय तक पहुंचे और एक साथ तलाशी अभियान शुरू कर दिया।
सात जिलों में एक साथ कार्रवाई
आयकर विभाग की यह कार्रवाई केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रही। विभाग की टीमों ने एक साथ सात जिलों में विधायक से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी। इनमें आवास, कार्यालय, प्लांट, और व्यावसायिक परिसरों को शामिल किया गया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और लेन-देन से जुड़े कागजात खंगाले गए।
खनन और निर्माण कार्यों की जांच
सूत्रों के मुताबिक यह पूरा मामला सड़क निर्माण और खनन परियोजनाओं से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। विधायक की कंपनियां सड़क निर्माण और खनन क्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्य कर रही हैं। इन परियोजनाओं में आय और खर्च के बीच भारी अंतर मिलने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
कौशांबी प्लांट पर विशेष जांच
कौशांबी जिले के जयंतीपुर स्थित प्लांट पर भी आयकर विभाग की टीम ने कई घंटों तक जांच की। यहां कर्मचारियों से पूछताछ की गई और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए। इस प्लांट का संबंध एयरपोर्ट से तपोस्थली तक बन रही फोर लेन परियोजना से बताया जा रहा है, जिसकी लागत करोड़ों रुपये में है।
सीएजी रिपोर्ट से जुड़ा मामला
पिछले वर्ष नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में सोनभद्र क्षेत्र में अवैध खनन से भारी राजस्व क्षति की बात सामने आई थी। माना जा रहा है कि उसी रिपोर्ट के बाद आयकर विभाग ने इस पूरे नेटवर्क की जांच तेज की और छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया।
राजनीतिक माहौल गर्म
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया है, जबकि आयकर विभाग का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और ठोस इनपुट के आधार पर की गई है।
फिलहाल जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल डाटा की जांच जारी है। आयकर विभाग की रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Jitendra Maurya

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