बस्ती में गुंडाराज: कंबाइन विवाद में बही खून की नदी, घर में घुसकर महिलाओं को पीटा!
दबंगों का खूनी तांडव: चांदा खुर्द में घंटों चला लाठियों का 'नंगा नाच', पुलिस बनी मूकदर्शक!
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: कानून का इकबाल खत्म! पैकोलिया में दबंगों का ‘नंगा नाच’, खून से सनी चांदा खुर्द की गलियां
- दिन-दहाड़े दहशत: लाठियों की गूंज से कांपा गांव, खून से लथपथ पीड़ितों को देख दहल जाएगा दिल!
- लाइव वीडियो सबूत फिर भी खाकी मौन! पैकोलिया पुलिस की सुस्ती या दबंगों को संरक्षण?
- बस्ती पुलिस को चुनौती: सरेआम हुआ जानलेवा हमला, घंटों बाद भी FIR दर्ज न होना शर्मनाक!
- कहाँ है कानून का खौफ? चांदा खुर्द में दबंगों ने घर फूंका या इंसानियत? पुलिस की कार्रवाई पर सवाल!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
08 अप्रैल, 2026
बस्ती। जनपद के पैकोलिया थाना क्षेत्र के चांदा खुर्द गांव में आज मानवता शर्मसार हो गई और कानून की धज्जियां उड़ती नजर आईं। कंबाइन मशीन ले जाने जैसे मामूली विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि गांव देखते ही देखते कुरुक्षेत्र के मैदान में तब्दील हो गया। मनबढ़ दबंगों ने घर में घुसकर महिलाओं और पुरुषों पर लाठियों की बरसात कर दी, जिससे कई लोग लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े।
दहशत का वो मंजर: घंटों चटकी लाठियां
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हमलावर इस कदर बेखौफ थे कि उन्हें न तो पुलिस का डर था और न ही समाज का। दिन-दहाड़े हुए इस खूनी संघर्ष में दबंगों ने पीड़ित रामकृष्ण दुबे के घर पर चढ़कर तांडव मचाया। चीख-पुकार और अफरातफरी के बीच लाठियां घंटों तक चटकती रहीं। इस हमले में कई महिला-पुरुष गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने दबंगों की मनमानी का विरोध किया।
घायलों की हालत नाजुक, जिला अस्पताल रेफर
घटना की सूचना पर पहुंची पीआरबी 112 ने आनन-फानन में घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गौर पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया है। घायलों के शरीर पर मौजूद गहरे जख्म दबंगों की हैवानियत की गवाही खुद दे रहे हैं।
पुलिस की सुस्ती या दबंगों को शह?
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित रामकृष्ण दुबे के पास इस पूरी बर्बरता का ‘लाइव वीडियो’ सबूत के तौर पर मौजूद है। वीडियो में हमलावर साफ तौर पर तांडव मचाते दिख रहे हैं। इसके बावजूद, घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पैकोलिया पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
बड़ा सवाल: क्या बस्ती पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है? आखिर वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस की कलम क्यों कांप रही है?
न्याय की गुहार, आक्रोश में ग्रामीण
पीड़ित पक्ष ने थाने में लिखित तहरीर देकर आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है। गांव में अभी भी तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
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अब देखना यह है कि बस्ती पुलिस इन ‘सफेदपोश’ गुंडों पर नकेल कसती है या फिर कागजी कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है।









