“खाकी और कलम पर वार: खोड़ारे में खनन माफिया का नंगा नाच, लेखपाल को लहूलुहान कर तोड़ा मोबाइल”
"खनन माफियाओं की गुंडागर्दी: परमिशन माँगी तो लेखपाल को पीटा, गोंडा पुलिस को खुली चुनौती" "मिट्टी के सौदागरों का खूनी खेल: कर्तव्य पालन पर भारी पड़ा माफिया का रसूख, लेखपाल पर जानलेवा हमला"
अजीत मिश्रा (खोजी)
खोड़ारे में कानून को ठेंगा: अवैध खनन रोकने गए लेखपाल पर माफिया का खूनी तांडव, प्रशासन मौन!
- “खोड़ारे में किसका राज? माफिया ने लेखपाल को सरेआम कूटा, 24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली”
- “सिस्टम लाचार, माफिया फरार: लेखपाल की पिटाई से तहसील में उबाल, कब होगी गिरफ्तारी?”
- “गुंडों के आगे नतमस्तक प्रशासन! लेखपाल को पीटने वाले माफिया को किसका संरक्षण?”
गोंडा। उत्तर प्रदेश में एक ओर जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गोंडा के खोड़ारे थाना क्षेत्र में खनन माफियाओं ने सरकार के इकबाल को चुनौती दे डाली है। केशव नगर ग्रंट पश्चिमी में ड्यूटी पर तैनात एक राजस्व अधिकारी (लेखपाल) को सरेआम पीटकर माफियाओं ने यह साफ कर दिया है कि उनके इलाके में ‘संविधान’ नहीं, बल्कि ‘सिंडिकेट’ का कानून चलता है।
घटनाक्रम: जब रक्षक ही बना भक्षक का शिकार
बीती 12 अप्रैल को दोपहर करीब 1:30 बजे, क्षेत्रीय लेखपाल विजेंद्र कुमार सक्सेना अपने कर्तव्य का पालन करने कोटिया पुरवा पहुँचे थे। वहां जेसीबी मशीनें (जेसीबी नंबर- UP 43 BT 2625) धरती का सीना चीरकर अवैध तरीके से बालू और मिट्टी का खनन कर रही थीं।
जैसे ही लेखपाल ने नियमतः परमिशन के कागजात माँगे, मौके पर मौजूद माफिया किसन कुमार उर्फ मलखू और उसके भाई विनोद ने अपने चार गुर्गों के साथ मिलकर उन पर हमला बोल दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावरों ने लेखपाल को जातिसूचक और भद्दी गालियां दीं और लात-घूंसों से उनकी जमकर पिटाई की। जब लेखपाल ने साक्ष्य जुटाने के लिए मोबाइल निकाला, तो उसे भी छीनकर तोड़ दिया गया ताकि अपराध के सबूत मिटाए जा सकें।
परमिशन माँगना पड़ा भारी, सरेआम किया हमला
मिली जानकारी के अनुसार, लेखपाल विजेंद्र सक्सेना को सूचना मिली थी कि कोटिया पुरवा के पास जेसीबी से अवैध बालू/मिट्टी का खनन कर ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरा जा रहा है। जब कर्तव्यनिष्ठ लेखपाल मौके पर पहुँचे और मुख्य आरोपी किसन कुमार (पुत्र उग्रसेन) से खनन के कागजात माँगे, तो माफिया और उसके साथी आगबबूला हो गए।
आरोप है कि किसन कुमार, विनोद और उनके 4 अन्य अज्ञात साथियों ने लेखपाल को भद्दी गालियां देते हुए घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान लेखपाल ने जब अपने मोबाइल से साक्ष्य के तौर पर फोटो खींचने की कोशिश की, तो हमलावरों ने मोबाइल छीन लिया और उन्हें जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए।
FIR दर्ज, पर पुलिस के हाथ अब तक खाली
घटना के 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी पुलिस की सुस्ती चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, लेखपाल की तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं (191(2), 352, 324(2), 351(3), 132, 121(1), 221) और खान एवं खनिज अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
लेखपालों में भारी आक्रोश, आंदोलन की सुगबुगाहट
इस कायराना हमले से मनकापुर तहसील के लेखपालों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। लेखपाल संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे कार्य बहिष्कार कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
तहसील में उबाल: “आज लेखपाल, कल कौन?”
इस घटना ने मनकापुर तहसील के पूरे प्रशासनिक अमले को हिला कर रख दिया है। लेखपाल संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह हमला केवल विजेंद्र सक्सेना पर नहीं, बल्कि समूचे राजस्व विभाग और शासन की गरिमा पर प्रहार है। तहसील परिसर में काम पूरी तरह ठप होने की कगार पर है। लेखपालों का सीधा सवाल है— “अगर माफिया के खिलाफ कागजात माँगना गुनाह है, तो हम अपनी सुरक्षा की गारंटी किससे माँगें?”
पुलिस की भूमिका पर उठते गंभीर सवाल
हैरानी की बात यह है कि प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR) में नामजद आरोपी होने के बावजूद पुलिस की पकड़ से वे अब तक दूर हैं।
- सवाल 1: क्या स्थानीय पुलिस को इस अवैध खनन की जानकारी पहले से नहीं थी?
- सवाल 2: 24 घंटे बाद भी मुख्य आरोपी किसन और विनोद खुलेआम क्यों घूम रहे हैं?
- सवाल 3: क्या इन माफियाओं को किसी बड़े राजनीतिक रसूख का संरक्षण प्राप्त है?
खनिज विभाग और पुलिस की साठगांठ की बू?
खोड़ारे का यह क्षेत्र लंबे समय से अवैध खनन की ‘सेफ जोन’ बना हुआ है। सूत्रों की मानें तो दिन के उजाले में जेसीबी चलना बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है। लेखपाल पर हुआ यह हमला उस गहरी साजिश का हिस्सा लग रहा है, जिसका मकसद सरकारी मुलाजिमों में खौफ पैदा करना है ताकि वे भविष्य में इन माफियाओं के रास्ते में रोड़ा न बनें।
बड़ा सवाल: > जब वर्दी और कलम की सुरक्षा करने वाले राजस्व अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा? क्या खोड़ारे पुलिस खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक है या फिर किसी सफेदपोश के दबाव में कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है?यदि प्रशासन ने इस मामले में कठोर मिसाल कायम नहीं की, तो आने वाले समय में माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो जाएंगे कि किसी भी सरकारी अधिकारी के लिए फील्ड में काम करना असंभव हो जाएगा। अब देखना यह है कि गोंडा पुलिस कब इन ‘मिट्टी के सौदागरों’ को सलाखों के पीछे भेजती है।









