अजीत मिश्रा (खोजी)
💧एक्सप्रेसवे पर ‘प्यास’ का खुला व्यापार: यूपीडा की नाक के नीचे जनता की जेब पर डाका!💧
- कहीं 28 तो कहीं 20; उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर पानी के दाम में ‘लोकेशन’ वाला खेल!
- एयरपोर्ट की तर्ज पर एक्सप्रेसवे पर ठगी: ₹18 की बोतल ₹28 में बेचने का नया फॉर्मूला।
- जनता से टोल भी और गोलमाल भी: एक्सप्रेसवे पर पानी की बोतलों पर छप रही ‘स्पेशल’ MRP?
लखनऊ/गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे अब सफर की सुगमता के लिए नहीं, बल्कि यात्रियों से सरेआम “लूट” के लिए पहचाने जाने लगे हैं। हर गाड़ी से सैकड़ों रुपये का भारी-भरकम टोल वसूलने वाली UPEIDA (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) की सरपरस्ती में मुनाफाखोरी का ऐसा गंदा खेल चल रहा है, जहाँ पानी की एक बोतल के दाम भी ‘लोकेशन’ देखकर बदल जाते हैं।
💧एयरपोर्ट वाला फॉर्मूला, जनता की जेब पर हमला
ताजा मामला गोरखपुर-लखनऊ रूट का है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की गोरखपुर लिंक रोड पर स्थित एक चाय की दुकान पर पानी (Kinley) की बोतल की कीमत देखकर किसी का भी माथा ठनक जाए। यहाँ बोतल पर बाकायदा ₹28 छपा हुआ है। जब दुकानदार से इस ‘विशेष’ कीमत का कारण पूछा गया, तो जवाब मिला— “सब माल एक्सप्रेसवे अथॉरिटी के जरिए सप्लाई होता है और दुकान का किराया ₹18 लाख है।”
यानी सीधे तौर पर एयरपोर्ट वाला फॉर्मूला अब सड़कों पर उतर आया है। अगर MRP पर सामान बेचना है, तो अपनी मनमर्जी की MRP ही छपवा लो! क्या प्रशासन ने दुकानदारों को जनता को लूटने का लाइसेंस दे दिया है?
💧कहीं ₹28 तो कहीं ₹20: नियमों की धज्जियां उड़ाते दुकानदार
लूट का यह तमाशा यहीं खत्म नहीं होता। सुल्तानपुर और लखनऊ के बीच एक पेट्रोल पंप पर स्थित दुकान में वही पानी की बोतल ₹18 की छपी हुई मिली। यानी पहली दुकान से ₹10 कम। लेकिन यहाँ भी ईमानदारी नदारद थी। दुकानदार ने साफ कहा— “मिलेगी ₹20 में ही।” छपे हुए दाम से ₹2 ज्यादा लेने का जब कारण पूछा गया, तो दुकानदार के पास ‘गुंडागर्दी’ भरे लहजे के अलावा कोई जवाब नहीं था।
🔥सवाल: क्या मुनाफाखोरी में यूपीडा भी हिस्सेदार है?
यह बेहद गंभीर विषय है कि उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर यात्री सुविधाओं के नाम पर लूट का बाजार सजा हुआ है।
- क्या यूपीडा की जिम्मेदारी सिर्फ टोल वसूलने तक सीमित है?
- क्या अथॉरिटी को इस बात की खबर नहीं है कि वेंडर्स पानी जैसी बुनियादी चीज पर मनमानी कीमतें वसूल रहे हैं?
- क्या भारी-भरकम किराए की वसूली के लिए यात्रियों को ‘चारा’ बनाया जा रहा है?
सैकड़ों रुपये का टोल देने के बाद यात्री उम्मीद करता है कि उसे उचित दाम पर सुविधाएं मिलेंगी, न कि उसे कदम-कदम पर ठगा जाएगा। पानी के अलग-अलग दामों का यह खेल साबित करता है कि एक्सप्रेसवे पर नियम नहीं, बल्कि वेंडर्स और अथॉरिटी की आपसी “सांठगांठ” चल रही है।
✍️प्रशासन की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर इस ‘लूट’ में किसका हिस्सा कहाँ तक जा रहा है?
ब्यूरो रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश










