
विकास खंड गौर का शर्मनाक कारनामा: कागजों में बह रही विकास की गंगा, मौके पर सिर्फ ‘सन्नाटा’
बस्ती में मनरेगा का 'महाघोटाला': धरातल पर नाला गायब, कागजों में 'खुदाई' का खेल! तेनुई चेत सिंह में सरकारी धन की खुली लूट: मजदूर नदारद, हाजिरी भर रहे 'भ्रष्टाचार के ठेकेदार'
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती का ‘मनरेगा घोटाला’: धरातल पर नाला गायब, कागजों में ‘खुदाई’ और सरकारी धन का बंदरबांट!
- डिजिटल’ धांधली: नाला खुदाई के नाम पर फर्जी हाजिरी का खेल, जिम्मेदारों की चुप्पी सवालों के घेरे में
- मनरेगा में फर्जीवाड़ा: तेनुई चेत सिंह में मची लूट, जांच की मांग
- बस्ती: बिना मजदूर के हो रही नाला खुदाई, पोर्टल पर ‘फर्जी हाजिरी’ का खुलासा
- तेनुई चेत सिंह मामला: प्रधान-सचिव की मिलीभगत से मनरेगा का ‘बंटाधार’
- जादुई विकास! तेनुई चेत सिंह में बिना मजदूर के खोदा जा रहा नाला
- मनरेगा का ‘अदृश्य’ कार्य: न फावड़ा चला, न मिट्टी उठी, बस खजाने से गायब हुआ पैसा
ब्यूरो, बस्ती मंडल: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में सरकारी योजनाओं का दम कैसे निकलता है, इसकी बानगी विकास खंड गौर की ग्राम पंचायत तेनुई चेत सिंह में देखने को मिल रही है। यहाँ ‘मनरेगा’ का काम धरातल पर तो नहीं, लेकिन सरकारी फाइलों और ऑनलाइन पोर्टल पर जोर-शोर से चल रहा है। आरोप है कि यहाँ नाला खुदाई के नाम पर मस्टररोल तो भरा जा रहा है, पर मौके पर न तो मजदूर हैं और न ही खुदाई का कोई नामो-निशां।

क्या है पूरा मामला?
ग्राम पंचायत तेनुई चेत सिंह में नाला सफाई और खुदाई के लिए मनरेगा के तहत धन आवंटित किया गया। कागजों के मुताबिक, यहाँ दर्जनों मजदूर पसीना बहा रहे हैं और विकास की गंगा बहाई जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि जब मौके पर जाकर देखा गया तो वहां सन्नाटा पसरा था। न कहीं फावड़ा चला, न मिट्टी खोदी गई, फिर भी मनरेगा के ऑनलाइन पोर्टल पर मजदूरों की फर्जी हाजिरी धड़ल्ले से दर्ज की जा रही है।
मेट से लेकर सचिव तक की ‘मिलीभगत’ का खेल
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि महिला मेट किरन द्वारा फर्जी तरीके से फोटो खींचकर और अपलोड कर मनमाने ढंग से हाजिरी भरी जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि बिना किसी पर्यवेक्षण के यह खेल कैसे चल रहा है? स्थानीय निवासियों का कहना है कि ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक की मौन स्वीकृति के बिना सरकारी धन की इस खुलेआम लूट को अंजाम देना नामुमकिन है। ये जिम्मेदार अधिकारी आखिर किसकी शह पर खामोश हैं?
डिजिटल इंडिया के दौर में ‘फर्जीवाड़े’ की पराकाष्ठा
सरकार मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल और जियो-टैगिंग का ढोल पीटती है। लेकिन तेनुई चेत सिंह की घटना ने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। पोर्टल पर कार्य की प्रगति दिखाई जा रही है, जबकि मौके पर जाकर देखें तो नाले आज भी कूड़े और गंदगी से अटे पड़े हैं। फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भी जिम्मेदारों का कानों पर जूं तक न रेंगना, प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है।
जनता का सवाल: कब होगी कार्रवाई?
क्षेत्र में भारी आक्रोश है। ग्रामीण अब जिलाधिकारी से आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सवाल यह है कि:
- क्या जांच के नाम पर हमेशा की तरह लीपापोती की जाएगी?
- क्या फर्जी हाजिरी भरने वाले मेट पर एफआईआर दर्ज होगी?
- क्या ग्राम प्रधान और सचिव की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराकर रिकवरी की जाएगी?
बस्ती प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या उनका काम केवल फाइलें भरना है या धरातल पर विकास करना? अगर समय रहते इस ‘मनरेगा घोटाले’ की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि भ्रष्टाचार को संरक्षण देना ही अब प्रशासन की कार्यप्रणाली बन चुकी है।
देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन दोषियों पर सख्त कार्रवाई का साहस दिखाएगा, या यह मामला भी फाइलों के कब्रगाह में दफन हो जाएगा?
















