हरैया में चोरों का ‘राज’, पुलिस बनी ‘लाचार’: माँ काली के मुकुट की चोरी ने खोली खाकी की पोल
अंधेर नगरी, हरैया पुलिस: मंदिरों में चोरी और सड़कों पर नशे का कारोबार, आखिर किसकी शह पर?
अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी की नाक के नीचे ‘अंधेर नगरी’: हरैया में चोर बेखौफ, पुलिस मस्त और जनता त्रस्त
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल
- हरैया पुलिस की गश्त पर बड़ा सवाल: चोर मंदिर लूट रहे और जिम्मेदार ‘वाहवाही’ लूटने में मस्त!
- खाकी का इकबाल खत्म? हरैया में बेखौफ अपराधी, थाने की फाइल में दम तोड़ रही जनता की उम्मीदें
- चोर-सिपाही का खेल बंद करो! मरोट कांड के एक महीने बाद भी पुलिस खाली हाथ, कब जागेगा प्रशासन?
- महुघाट से बड़हर तक ‘नशे का नेक्सस’: क्या पुलिस की सुरक्षा में फल-फूल रहा है हरैया का अपराध जगत?
हरैया (बस्ती): उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की सबसे बड़ी तहसील हरैया में कानून-व्यवस्था का जनाजा निकल चुका है। यहाँ खाकी का इकबाल खत्म हो चुका है और अपराधियों का राज है। एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन माँ काली के दरबार से चोरी हुआ लाखों का चांदी का मुकुट आज भी पुलिस की पहुंच से दूर है। यह नाकामी सिर्फ एक चोरी की नहीं, बल्कि हरैया पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
पुलिस की गश्त या ‘चोर-सिपाही’ का खेल?
हरैया थाना क्षेत्र में पुलिस की गश्त सिर्फ कागजों तक सीमित है। हकीकत यह है कि जब चोर मंदिरों में सेंध लगाकर आस्था को तार-तार कर रहे हैं, तब पुलिस ‘कुंभकर्णी नींद’ में सो रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस केवल अपनी कुर्सी बचाने के लिए कभी-कभार छोटे-मोटे चोरों को पकड़कर वाहवाही लूटती है, जबकि असली अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।
गोभिया ग्राम पंचायत के मरोट गांव स्थित काली माता मंदिर में हुई चोरी ने साबित कर दिया है कि अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं। बदमाशों ने न केवल चोरी की, बल्कि हरैया पुलिस को खुली चुनौती भी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस का ध्यान अपराधियों को पकड़ने के बजाय अन्य अवैध गतिविधियों से ‘हिस्सा’ वसूलने में ज्यादा है।
नशे के कारोबार को ‘सुरक्षा कवच’ का आरोप
क्षेत्र में चर्चा आम है कि हरैया पुलिस की मिलीभगत से ही चोरी और नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। महुघाट से लेकर बड़हर चौराहा तक नशे के सौदागर बेखौफ अपना जाल फैलाए हुए हैं। आरोप तो यहाँ तक है कि थाना अध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस प्रशासन इन ड्रग्स माफियाओं को सुरक्षा मुहैया कराता है।
क्या फाइल जाएगी कूड़ेदान में?
जनता में डर और गुस्सा दोनों है। सवाल यह है कि:
- क्या हरैया पुलिस के पास चोरों का सुराग नहीं है, या वो पकड़ना ही नहीं चाहती?
- नशे के कारोबारियों पर कब तक मेहरबानी बरती जाएगी?
- क्या माँ काली का मुकुट बरामद होगा, या यह फाइल भी रद्दी की टोकरी और कूड़ेदान की भेंट चढ़ जाएगी?
हरैया पुलिस का यह रवैया आम जनता के भरोसे को तोड़ रहा है। यदि पुलिस ने जल्द ही अपना आचरण नहीं सुधारा और अपराधियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। अब देखना यह है कि क्या हरैया पुलिस इस चुनौती को स्वीकार कर अपनी साख बचाती है या फिर चोरों की शह पर ही काम करना जारी रखती है।
















