बस्ती: गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष पर पत्रकार के घर में घुसकर गाली-गलौज और धमकी का आरोप
दबंगई पर उतारू 'गोसेवा आयोग' के उपाध्यक्ष! पत्रकार ने दर्ज कराई तहरीर
बस्ती: गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष पर पत्रकार के घर घुसकर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप
बस्ती, 27 मई 2026
- जमीन विवाद में गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष की ‘गुंडागर्दी’, महिलाओं के साथ अभद्रता और जान से मारने की धमकी
- गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष के खिलाफ पत्रकार ने दी तहरीर
- बस्ती: गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल विवादों में
- जमीन विवाद: पत्रकार के घर में घुसकर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप
- क्या कानून से ऊपर हैं गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष? घर में घुसकर अभद्रता पर उठे सवाल
- बस्ती: जब ‘गोसेवक’ ही करने लगे गुंडागर्दी, पीड़ित पत्रकार ने मांगी न्याय की गुहार
बस्ती के शिवनगर तुरकहिया क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय पत्रकार विवेक त्रिपाठी (पुत्र विपिन बिहारी त्रिपाठी) ने ‘गोसेवा आयोग’ के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल और उनके सहयोगियों पर घर में घुसकर दुर्व्यवहार करने, महिलाओं के साथ गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए CO सिटी सदर को तहरीर दी है।
क्या है पूरा मामला?
तहरीर के अनुसार, विवाद की जड़ एक जमीन (बैनामा संख्या 404/04) है, जो पत्रकार की पत्नी के नाम दर्ज है। पीड़ित का कहना है कि यह जमीन उनके घर के सामने स्थित है। आरोप है कि 26 मई 2026 की सुबह करीब 9:30 बजे, गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल अपने साथियों—मोहित शुक्ल और मुन्ना शुक्ल—के साथ वहां पहुंचे।
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने जमीन पर रखे कुछ रोड़े (ईंट) हटाए, तो आरोपी पक्ष भड़क गया। इसके बाद आरोपियों ने घर में घुसकर उनके पिता के साथ धक्का-मुक्की की और परिवार की महिलाओं के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।
जमीन का मालिकाना हक और विवाद
पीड़ित का दावा है कि जमीन का कानूनी रूप से बैनामा कराया गया है और उसका दाखिल-खारिज भी हो चुका है। उनका कहना है कि यदि महेश शुक्ल को इस जमीन पर कोई आपत्ति थी, तो उन्हें कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए था या जमीन की पैमाइश करानी चाहिए थी। पीड़ित ने कहा, “अगर पैमाइश में जमीन उनकी निकलती है, तो हमें उसे सौंपने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस तरह की गुंडागर्दी और महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
पीड़ित पत्रकार विपिन त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने अपने घर के सामने सड़क पर फैले कीचड़ से राहगीरों को निजात दिलाने के लिए वहां मलबा गिरवाया था। इसी बात को लेकर राज्यमंत्री महेश शुक्ला नाराज हो गए। आरोप है कि मंत्री अपने कुछ सहयोगियों के साथ पत्रकार के घर पहुंचे और अभद्रता शुरू कर दी।
हाथापाई और जान से मारने की धमकी
विपिन त्रिपाठी ने तहरीर में आरोप लगाया है कि जब उन्होंने मंत्री के व्यवहार का विरोध किया, तो मंत्री और उनके साथियों ने उनके साथ हाथापाई की। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। पत्रकार के बेटे विवेक त्रिपाठी ने भी आरोप लगाया कि मंत्री ने उनके पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी है, जिससे परिवार दहशत में है।
नैतिकता पर सवाल
यह घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर इस तरह के गंभीर आरोप लगना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जानकारों का कहना है कि समाज के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को कानून का सम्मान करना चाहिए और विवादों को आपसी सहमति या अदालत के माध्यम से सुलझाना चाहिए। सड़क पर उतरकर हिंसा और गाली-गलौज करना न केवल अनुचित है, बल्कि कानून के खिलाफ भी है।
आरोपी पक्ष की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर अपना पक्ष जानने के लिए पत्रकार ने महेश शुक्ल से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। खबर लिखे जाने तक आरोपी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यदि भविष्य में उनका पक्ष मिलता है, तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
पुलिस की क्या है कार्रवाई?
पीड़ित परिवार ने घटना की तहरीर कोतवाली पुलिस को दी है और सुरक्षा की गुहार लगाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली प्रभारी मोती चंद राजभर ने बताया कि तहरीर प्राप्त हो गई है। पुलिस वायरल वीडियो की जांच कर रही है और तथ्यों के आधार पर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
















