उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर 

सिद्धार्थनगर में मौत का ‘विद्या’ कांड: लूट के लिए ली बुजुर्ग की जान, प्रशासन बना मूकदर्शक!

पैसे की हवस में 'हैवान' बने डॉक्टर! मरीज की मौत के बाद भी नहीं पसीजा दिल, 72 हजार की अवैध वसूली। सीज होने के बाद फिर खुला 'मौत का अस्पताल': क्या स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से चल रहा यह गोरखधंधा?

अजीत मिश्रा (खोजी)

सिद्धार्थनगर: ‘धरती के भगवान’ बने हैवान! इलाज के नाम पर मौत का सौदागर बना ‘कृष्णा-विद्या’ अस्पताल

  • आयुर्वेद डॉक्टर की ‘जहरीली’ सर्जरी: इलाज के नाम पर लूट और मौत का खेल, जिम्मेदार कौन?
  • नाम बदला, काम नहीं: सिद्धार्थनगर में कैसे फिर खुला सीज हो चुका ‘विद्या हॉस्पिटल’?
  • आयुष्मान कार्ड का मजाक! मरीज की जान लेकर 72 हजार ऐंठने वाले ‘डॉक्टरों’ पर कब गिरेगी गाज?

सिद्धार्थनगर: क्या सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य विभाग का कोई वजूद बचा है? या फिर यहाँ के चंद निजी अस्पतालों ने मानवता को ही गिरवी रख दिया है? मोहाना थाना क्षेत्र में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर एक घिनौना खेल सामने आया है, जहाँ पैसे की हवस में अंधे हुए कथित ‘डॉक्टर’ ने एक बुजुर्ग की जान ले ली। यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि यह उस क्रूर व्यवसाय का हिस्सा है जो खुलेआम प्रशासन को चुनौती दे रहा है।

मौत के मुँह में धकेला, फिर लूटे 72 हजार

मामला मोहाना स्थित ‘विद्या हॉस्पिटल’ का है। आरोप है कि एक दुर्घटना के बाद बुजुर्ग को अस्पताल लाया गया, जहाँ आयुर्वेद की डिग्री रखने वाले तथाकथित डॉक्टर अजय यादव ने बिना किसी विशेषज्ञता के ऑपरेशन का दुस्साहस किया। हद तो तब हो गई जब आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद परिजनों से 72 हजार रुपये ऐंठ लिए गए। मरीज की मौत के बाद भी परिजनों को अंधेरे में रखा गया और सुबह मौत की सूचना दी गई। यह इलाज नहीं, बल्कि सोची-समझी हत्या और लूट का मामला है।

स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी या मिलीभगत?

यह अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है। जिस अस्पताल को पहले ‘विद्या हॉस्पिटल’ के नाम से सीज किया गया था, वह रातों-रात ‘कृष्णा हॉस्पिटल’ कैसे बन गया? और सबसे बड़ी बात, सीज होने के बाद पुनः वही पुराने नाम से संचालित कैसे हो रहा है?

क्या सीएमओ कार्यालय की फाइलों में ये अस्पताल अदृश्य हैं? या फिर मोटी रकम के बदले इन मौत के सौदागरों को जीवन की डोर से खेलने का लाइसेंस दे दिया गया है?

प्रशासन अब भी सोएगा?

परिजनों ने जिलाधिकारी से लेकर सीएमओ, आईजीआरएस और थाना मोहाना तक गुहार लगाई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कागजी शिकायतों के बाद कार्रवाई होगी? या फिर रसूख के दम पर इस अस्पताल को फिर से किसी दूसरे नाम से शुरू करने की साजिश रची जाएगी?

  • प्रश्न: क्या एक आयुर्वेद डॉक्टर को जटिल सर्जरी करने का अधिकार है?
  • प्रश्न: सीज होने के बाद अस्पताल का संचालन जारी रहना किस अधिकारी की लापरवाही है?
  • प्रश्न: मृतक परिवार को न्याय कब मिलेगा?

सिद्धार्थनगर की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, सख्त कार्रवाई चाहती है। समय आ गया है कि इस तरह के ‘मौत के अड्डों’ को स्थायी रूप से बंद कर इनके संचालकों को सलाखों के पीछे भेजा जाए। यदि प्रशासन अब भी मौन रहा, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि अस्पताल की इन काली कमाई में महकमे के रसूखदारों का भी हिस्सा शामिल है।

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