उत्तर प्रदेशबस्ती

विशेष रिपोर्ट: बस्ती के मैरिज हॉल और होटल—प्रशासन की नींद या किसी बड़ी त्रासदी का इंतज़ार?

‘जागो’ प्रशासन ‘जागो’ नहीं तो ‘लखनऊ’ से ‘बड़ी’ घटना हो ‘जाएगी’ सुरक्षा मानकों की धज्जियां: बस्ती के मैरिज हॉल और होटल बने मौत का अड्डा

​अजीत मिश्रा (खोजी)

‘जागो’ प्रशासन, कहीं ‘लखनऊ’ से बड़ी त्रासदी की प्रतीक्षा में तो नहीं आप?

  • नोटिस का खेल और भ्रष्टाचार: पंजीकरण के नाम पर हो रहा आमजन की जान का सौदा
  • अवैध होटलों में अनैतिक कारोबार: शिकायतें दर्ज, फिर भी प्रशासन की चुप्पी बरकरार
  • फायर ब्रिगेड तक नहीं पहुँच सकती जहाँ, वहाँ धड़ल्ले से चल रहे मैरिज हॉल
  • प्रशासन की मिलीभगत या उदासीनता? क्या किसी बड़ी त्रासदी का इंतज़ार कर रहे जिम्मेदार?

बस्ती। क्या प्रशासन को किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार है? यह सवाल आज बस्ती के हर नागरिक की ज़ुबान पर है, जो व्यवस्था की विफलता को देखकर स्तब्ध है। वर्षों से मीडिया और आम जनता प्रशासन को नींद से जगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।शहर में संचालित हो रहे अधिकांश मैरिज हॉल और होटल सुरक्षा के मानकों को ताक पर रखकर मौत का कुआं बने हुए हैं। बार-बार आगाह करने और मीडिया द्वारा लगातार आवाज़ उठाने के बावजूद, जिला प्रशासन ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

​सुरक्षा मानकों की धज्जियां, प्रशासन का ‘नोटिस’ का खेल

​शहर में धड़ल्ले से चल रहे मैरिज हॉल और होटल सुरक्षा के तमाम मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। सराय एक्ट के तहत पंजीकरण के नाम पर प्रशासन केवल औपचारिकता निभा रहा है—नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है। क्या यह ‘नोटिस’ का खेल केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए है? प्रशासन द्वारा सराय एक्ट के तहत पंजीकरण के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।

  • जिला प्रशासन और एडीएम कार्यालय की ओर से पंजीकरण के लिए केवल नोटिस जारी किए जाते हैं, जबकि इनका पालन सुनिश्चित कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई गई है।
  • प्रशासन के पास यह रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं है कि कितने लोगों ने आवेदन किया और कितनों का पंजीकरण वास्तव में हुआ है।
  • आरोप है कि यह प्रक्रिया केवल ‘वसूली’ का माध्यम बनकर रह गई है, जहाँ नोटिस का खेल खेलकर अधिकारियों की जेबें भरी जा रही हैं।

​लापरवाही की पराकाष्ठा: मौत को न्योता

​स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:

  • ​ऐसे मैरिज हॉल मौजूद हैं जिनके पास पहुँचने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियों तक का रास्ता नहीं है।
  • ​तीन मैरिज हॉल एक साथ महज 10 फीट की दूरी पर संचालित हो रहे हैं, जहाँ किसी भी बड़ी आगजनी के समय भगदड़ मचने पर स्थिति भयावह हो सकती है।
  • ​प्रशासन की मिलीभगत और अनदेखी के कारण, मानकों को ताक पर रखकर ये संस्थान अवैध कमाई का अड्डा बने हुए हैं।

​सुरक्षा की अनदेखी और जानलेवा स्थिति

  • शहर के भीतर ऐसे दर्जनों मैरिज हॉल हैं जो आगजनी या किसी अन्य आपातकालीन स्थिति के लिए पूरी तरह असुरक्षित हैं।
  • शहर में तीन ऐसे मैरिज हॉल हैं जो एक-दूसरे से महज 10 फीट की दूरी पर स्थित हैं और उनके बीच 15 फीट का भी रास्ता नहीं है। ऐसी स्थिति में, यदि कोई अग्निकांड होता है, तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां वहां तक पहुंच ही नहीं सकेंगी।
  • असुरक्षा की यह स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब एक ही समय पर इन तीनों हॉल में बारातें होती हैं।

होटलों में अनैतिक गतिविधियां और प्रशासन की चुप्पी

  • होटलों का हाल मैरिज हॉल से भी बदतर है। हाल ही में शहर के आधा दर्जन से अधिक बदनाम होटलों पर छापेमारी की गई थी।
  • छापेमारी के दौरान लगभग सभी होटलों में अवैध और अनैतिक कार्य होते पाए गए थे।
  • इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी (डीएम) को सौंपी गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक उन होटल संचालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
  • यहां तक कि बलात्कार का शिकार हुई लड़कियों ने भी पुलिस और प्रशासन को उन होटलों के नाम बताए हैं जहां उन्हें ले जाकर गलत काम करवाया गया था, जिसमें एक राजनेता से जुड़ा होटल भी शामिल है।

क्या अपराधियों को संरक्षण मिल रहा है?

​सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि प्रशासन के सामने बदनाम होटलों में अनैतिक कार्यों की शिकायतें और यहाँ तक कि लड़कियों के बयान भी दर्ज हैं। इसके बावजूद, किसी भी होटल को सील करने या मालिकों पर सख्त कार्रवाई करने में प्रशासन क्यों झिझक रहा है? क्या आम आदमी की जान की कीमत प्रशासन की जेबों से कम है?

निष्कर्ष: प्रशासन का यह रवैया घोर लापरवाही और कदाचार की श्रेणी में आता है। यदि समय रहते पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कराया गया, तो लखनऊ जैसी त्रासदी के लिए सीधे तौर पर प्रशासन जिम्मेदार होगा। अब समय आ गया है कि प्रशासन ‘नोटिस’ भेजने का दिखावा बंद करे और सख्त कार्रवाई कर जनता के भरोसे को बहाल करे।बस्ती का आम नागरिक और मीडिया लगातार प्रशासन से इन असुरक्षित प्रतिष्ठानों की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। यदि प्रशासन ने समय रहते जागकर इन अवैध होटलों और मैरिज हॉल्स का पंजीकरण रद्द नहीं किया या सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करवाया, तो बस्ती में लखनऊ जैसी बड़ी त्रासदी घट सकती है। यह स्पष्ट है कि प्रशासन की उदासीनता और भ्रष्टाचार के चलते आम आदमी की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है।

क्या आपको लगता है कि स्थानीय राजनेताओं का संरक्षण ही इन अवैध होटलों और मैरिज हॉल्स के बेखौफ चलने का मुख्य कारण है?

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