उत्तर प्रदेशबस्ती

पुलिस-आबकारी की ‘मिलीभगत’ का कच्चा चिट्ठा: छावनी में फल-फूल रहा अवैध शराब का साम्राज्य

छावनी का 'माझा' बना अवैध शराब का गढ़: धधक रही हैं भट्टियाँ, सो रहा प्रशासन; 'एक पर कार्रवाई, दस को खुला लाइसेंस': छावनी थाना क्षेत्र में माफियाओं के आगे नतमस्तक खाकी

अजीत मिश्रा (खोजी)

छावनी का ‘माझा’ बना अवैध शराब का गढ़: पुलिस और आबकारी की ‘मिलीभगत’ से धधक रही हैं कच्ची शराब की भट्टियाँ

  • खाकी की मेहरबानी: छावनी में नियमों की बलि, अवैध शराब की ‘दिवाली’
  • वीडियो वायरल, फिर भी बेअसर; छावनी में ‘हीलाहवाली’ का खेल जारी
  • सबूतों के बावजूद मौन क्यों? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को भी ठेंगा दिखा रहे जिम्मेदार
  • छावनी में ‘जहर’ का कारोबार: खुलेआम बिक रही कच्ची शराब, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

बस्ती: छावनी थाना क्षेत्र का माझा इलाका इन दिनों अपराधियों और शराब माफियाओं के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है। बाघानाला और छतौना के आसपास कच्ची शराब का कारोबार इस कदर फल-फूल रहा है कि मानो प्रशासन का इकबाल खत्म हो गया हो। दिन-दहाड़े धधक रही शराब की भट्टियाँ और बेखौफ बिकती अवैध शराब न केवल कानून का मजाक उड़ा रही हैं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के भविष्य को भी बर्बाद कर रही हैं।IMG 20260707 WA0459

​खानापूर्ति बनी पुलिस की कार्यप्रणाली

​स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की कार्यप्रणाली केवल ‘दिखावे’ तक सीमित है। सूत्रों की मानें तो पुलिस द्वारा अवैध कारोबारियों पर एक कार्रवाई की जाती है, तो उसके बदले में दस नए लोगों को अवैध काम करने का अप्रत्यक्ष ‘लाइसेंस’ दे दिया जाता है। इस ‘एक पर कार्रवाई, दस को छूट’ के खेल ने पूरे इलाके में शराब माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

​सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो भी बेअसर

​ग्रामीणों का आक्रोश अब सोशल मीडिया पर फूट रहा है। लोग अवैध शराब की बिक्री और भट्टियों के वीडियो बनाकर लगातार वायरल कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। ऐसा लगता है कि प्रशासन को सबूतों की नहीं, बल्कि केवल मूकदर्शक बने रहने की आदत हो गई है।

​आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध

​सबसे बड़ा सवाल आबकारी विभाग की कार्यशैली पर उठ रहा है। विभागीय अधिकारियों को सब कुछ पता होने के बावजूद चुप्पी साधे रखना उनकी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। क्षेत्रवासी पूछ रहे हैं कि यदि अवैध शराब की बिक्री और दुकानों के संचालन की जानकारी विभाग को है, तो फिर इन पर पूर्ण प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जा रहा? क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

​’एमआरपी’ से अधिक वसूली पर भी मौन

​सिर्फ कच्ची शराब ही नहीं, बल्कि वैध देशी शराब के ठेकों पर भी मनमानी चरम पर है। कुछ दिन पूर्व ही उपभोक्ताओं ने नियमों को ताक पर रखकर एमआरपी से अधिक कीमत वसूलते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया था, लेकिन उस मामले में भी प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यह साफ दर्शाता है कि क्षेत्र में नियमों का पालन कराने वाला कोई नहीं है।

​क्या बिक चुका है प्रशासन?

​सूत्रों का दावा है कि पुलिस और आबकारी विभाग की ‘सेटिंग’ के कारण ही यह अवैध साम्राज्य पनप रहा है। जानकारी में होने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर की जा रही यह हीलाहवाली अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

​क्या जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर माफियाओं पर कठोर कार्रवाई करेंगे, या फिर यह क्षेत्र इसी तरह जहर परोसने का केंद्र बना रहेगा?

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