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आखिर क्यों होते हैं प्राकृतिक प्रकोप

आखिर क्या है प्राकृतिक प्रकोप के कारण

 

बलदेव चौधरी की कलम से

 

जैसा कि शास्त्रों और विज्ञान द्वारा प्रमाणित है कि प्रकृति के कुछ नियम है जेसे की आदान प्रदान उनमें से एक है जब ये आदान प्रदान का संतुलन बाधित होता है जैसे वर्तमान की बात करे तो एक सबसे अधिक पेड़ पौधे और और पहाड़ आदि प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में बहुत बड़ा योगदान करते हैं और बड़ी विचित्र बात सामने आई है एक और अनाधुंध घने जंगलों की कटाई बड़े पैमाने पर हो रही है और दूसरी तरफ एक पैड मां के नाम का अभियान इसलिए कहा की लाखों वृक्षों को नष्ट करके एक पेड़ से उसकी क्षति पूर्ति नहीं होती आप को बता दें एक गांव का किसान कभी भी एक हरे वृक्ष को नष्ट नहीं करता और वह अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए लकड़ी का उपयोग इस तरह करता है जिससे पेड़ की आयु बढ़ती है उसकी शाखाओं की छटाई करने से इसी प्रकार अनेकों आदान प्रदान के प्राकृतिक नियम है जिनके असंतुलन से प्रकृति प्रकोप होते हैं जैसे जल चाहें वो नदी तालाब कुआं किसी भी स्रोत का हो आदान प्रदान होगा शुद्ध और स्वच्छ होगा और रुक जाए यानी आदान प्रदान ना हो तो पानी सड़ जायेगा कीड़े पड़ जायेगे बीमारी फैलेगी ,क्या होगा प्रकृति का नियम भंग होगा और इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति भोजन करता जाए करता जाए और मल मूत्र त्याग ना करे परिणाम क्या होगा आदान प्रदान बाधित होने से व्यक्ति बीमार पड़ जायेगा ,और यदि जन्म ही जन्म हो किसी की मृत्यु ना हो तो परिणाम क्या होगा ,और मृत्यु ही मृत्यु हो जन्म ना हो क्या होगा आदान प्रदान का संतुलन बिगड़ जायेगा परिणाम आप समझ गए होंगे और विश्लेषण किया जाए तो बहुत विस्तार हो जायेगा इसलिए आदान प्रदान की नियम हर बात पर लागू होता है और जब जब उसका नियम टूटता है तो प्रकृति प्रकोप होते हैं जिनके जिम्मेदार सिर्फ सिर्फ़ और सिर्फ़ मनुष्य जाति है कोई पशु पंछी नही क्योंकि मनुष्य ही प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कृति है थोड़ा विस्तार हो जायेगा पशु योनि को भी प्राकृतिक नियम से छेड़छाड़ करके वर्णशंकर नश्ले तैयार कर दी गई जेसे जर्सी और होलिस्टर गाय जिसके दुग्ध से पोषण की बजाय कैंसर जैसी बीमारियों के शिकार लोग हो रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी संख्या इतनी बढ गई की खेतों में फसल चौपट किसानों की ,और सड़कों पर आवारा मनुष्य की लालच भरी खोपड़ी की उपज जो नित्य प्रति दुर्घटनाओं का कारण बन रही है ये है आदान प्रदान के नियम के साथ छेड़छाड़ और परिणाम आपके सामने,क्या करे साहब बताते बताते विस्तार हो जायेगा,बात करे फल साग सब्जियों की मनुष्य ने इसको भी वर्णशंकर नश्लो में बदल दिया जिसका असर आपको टमाटर बैंगन गोभी मूली के अलावा आम पपीता तरबूज आदि में देखने को मिल जायेगा जो बिना उनकी ऋतु के कैमिकल इस्तेमाल कर अपनी लालच के लिए पौष्टिक आहार के स्थान पर जहरीला आहार फल साग सब्जियों को तैयार किया जा रहा है और बेचारा मनुष्य मूक दर्शक बन ये सब देख रहा है और अधिक नही बता सकता विस्तार हो जायेगा बस इतना समझ ले हवा पानी और भोजन जितना प्राकृतिक ले सकते है प्रयास करें जब प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया तो झूठी शान और लालच के वशीभूत आदान प्रदान के नियम का उलंघनIMG 20260716 WA0019 क्यों,और और प्राकृतिक नियम केवल मनुष्य के लिए है जो इनका उलंघन करता है वह मानव नही दानव है आप किस श्रेणी में रहना पसंद करते है विचार करें और प्राकृतिक प्रकोप से बचना चाहते हैं तो प्रकृति के संतुलन के लिए प्राकर्तिक नियमों का पालन करें ये लेख अखिल विश्व हितार्थ एवम मानव कल्याण की कामना की विचारधारा से है कोई भी इसको निजी रूप से ना ले ऐसी आशा की जाती है

जय हिन्द

लेखक बलदेव चौधरी

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