
दरभंगा जिला के केवटी प्रखंड अंतर्गत पिण्डारूच गांव में अवस्थित द्रोण एकेडमी परिसर में इस वर्ष मां सरस्वती पूजनोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ किया गया। शिक्षा, कला और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की आराधना के लिए संस्थान का पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया। छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी और रचनात्मक प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।
पूजनोत्सव की शुरुआत विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। संस्थान के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर बच्चों ने न केवल धार्मिक आस्था का परिचय दिया, बल्कि अनुशासन, सामूहिकता और सांस्कृतिक चेतना का भी संदेश दिया। पूरे कैंपस को रंग-बिरंगे फूलों, प्राकृतिक वस्तुओं और विद्यार्थियों द्वारा स्वयं तैयार किए गए क्राफ्ट से आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जो उपस्थित लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
इस वर्ष के आयोजन की एक विशिष्ट विशेषता रही ‘मातृशक्ति पूजनोत्सव’, जिसका आयोजन द्रोण एकेडमी परिसर में विद्यार्थियों द्वारा किया गया। इस अवसर पर मां सरस्वती के साथ-साथ अन्य देवी स्वरूपों की भी विधिवत पूजा की गई। कैंपस में बच्चों द्वारा मां दुर्गा, मां काली, मां लक्ष्मी, मां अन्नपूर्णा, मां तारा, मां संतोषी एवं माता छिन्नमस्तिका की आराधना हेतु अलग-अलग पूजन स्थल बनाए गए थे। इन पूजन स्थलों को छात्रों ने अपने हाथों से सजाया, जिसमें प्राकृतिक सामग्री, मिट्टी, कागज, फूल और अन्य पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं का प्रयोग किया गया।
पूजन-अर्चना की मुख्य जिम्मेदारी संस्थान के तीन छात्रों आकाश, कृष्णदेव एवं तरुण ने निभाई। इन छात्रों ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कराई। वहीं अन्य छात्र-छात्राओं ने भी पूरे मनोयोग और श्रद्धा के साथ पूजन में भाग लिया। बच्चों की अनुशासित सहभागिता और धार्मिक अनुष्ठान की समझ ने सभी अभिभावकों और आगंतुकों को प्रभावित किया।
पूजनोत्सव के दौरान अभिभावकों के साथ-साथ क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों द्वारा किए गए प्रयासों, उनकी रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उपस्थित अभिभावकों का कहना था कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक संस्कार विकसित होते हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है।
सायंकाल के समय मां सरस्वती की सायंवंदना का आयोजन किया गया, जिसमें पूरे परिसर में भक्तिमय माहौल व्याप्त हो गया। भजन-कीर्तन और आरती के माध्यम से विद्यार्थियों ने मां सरस्वती से विद्या, विवेक और सद्बुद्धि की कामना की। दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार ने वातावरण को अत्यंत शांत और आध्यात्मिक बना दिया।
अगले दिन विधिवत पूजा समापन के पश्चात मां सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। पास के ही तालाब में श्रद्धा और नियमों के अनुसार प्रतिमा को प्रवाहित कर कार्यक्रम का समापन किया गया। विसर्जन के दौरान भी बच्चों में अनुशासन और श्रद्धा का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
कुल मिलाकर द्रोण एकेडमी, पिण्डारूच में आयोजित यह मां सरस्वती पूजनोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक मूल्यों और सामूहिक सहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी बना। इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा संस्थान यदि चाहें तो पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार और संस्कृति का भी सशक्त माध्यम बन सकते हैं।




















