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कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

मांधाता क्षेत्र के रामनगर हैंसी में श्रीमद् भागवत कथा की बह रही अमृत रसधार, श्रद्धालु मंत्रमुग्ध

कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

अजगरा, प्रतापगढ़। भव्य एवं पारंपरिक वेश में मंगलवार को मांधाता क्षेत्र के रामनगर हैंसी में श्रीमद् भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। परम पूज्य अतुल जी महराज के नेतृत्व में क्षेत्र के कथा आयोजन स्थल से पवित्र जलस्रोत से जल भरने के साथ शुरू हुई कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष वर्ग के श्रद्धालु शामिल रहे। पवित्र जलस्रोत से कलश को भरकर लाने के बाद कथा आयोजन स्थल पर धार्मिक विधि एवं मंत्रोच्चारण के साथ कलश को स्थापित किया गया। आरती के साथ शुरू किए गए श्रीमद् भागवत कथा में संत अतुल जी महराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम इसकी महिमा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विश्व में सभी कथाओं में ये श्रेष्ठ मानी गई है। जिस स्थान पर इस कथा का आयोजन होता है वो तीर्थ स्थल कहलाता है। इसका सुनने एवं आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियों को ही मिलता है। ऐसे में अगर कोई दूसरा अन्य भी इसे गलती से भी श्रवण कर लेता है तो भी वो कई पापों से मुक्ति पा लेता है। इसलिए सात दिन तक चलने वाली इस पवित्र कथा को श्रवण करके अपने जीवन को सुधारने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। अगर कोई सात तक किसी व्यवस्तता के कारण नहीं सुन सकता है तो वह दो तीन या चार दिन ही इसे सुनने के लिए अपना समय अवश्य निकाले तब भी वो इसका फल प्राप्त करता है। क्योंकि ये कथा भगवान श्री कृष्ण के मुख की वाणी है जिसमें उनके अवतार से लेकर कंस वध तक प्रसंग का उल्लेख होने के साथ साथ इसकी व्यक्ति के जीवन में महत्ता के बारे में भी बताया गया है। इसके सुनने के प्रभाव से मनुष्य बुराई त्याग कर धर्म के रास्ते पर चलने के साथ साथ मोक्ष को प्राप्त करता है। संत अतुल जी महराज ने बताया कि इस कथा को सबसे पहले अभिमन्यु के बेटे राजा परीक्षित ने सुना था जिसके प्रभाव से उसके अंदर तक्षक नामक नाग के काटने से होने वाली मृत्य़ु का भय दूर हुआ और उसने मोक्ष को प्राप्त किया था।

कथा के मुख्य यजमान राम प्रवेश मिश्र एवं शान्ती मिश्रा रही वही व्यवस्थापक आदित्य प्रसाद मिश्रा व अर्पित मिश्र दूर दराज से आए हुए समस्त श्रद्धालु भक्तों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर रमा शंकर मिश्रा, उदयराज पाण्डेय, रमेश, रामसजीवन, नीरज, मंगला प्रसाद, विजय, दिवाकर, दुर्गेश, चंद्रभूषण, राहुल, दीपक समेत सैकड़ों श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।

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