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अंधेरी मंडी, चौपट व्यवस्था: किसानों की जमीन पर कब्ज़ा, सचिव की चुप्पी खतरनाक!”

आष्टा (संदीप छाजेड़)Screenshot 20250709 223554

कृषि उपज मंडी आष्टा एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली और अव्यवस्थाओं के चलते सुर्खियों में है। मंडी की हालत ऐसी हो चली है कि अब इसे “कृषि उपज मंडी” की जगह लोग “कब्ज़ा उपज मंडी” कहने लगे हैं।

कुछ दिन पूर्व मंडी के पीछे गेट से चद्दर और पाइप लाने का मामला सामने आया था — जो साफ तौर पर नियमों की अवहेलना था। लेकिन इस गंभीर प्रकरण में मंडी सचिव ने मात्र एक फर्म को नोटिस थमा कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। न कार्रवाई हुई, न ही अतिक्रमण हटा।

❓ सवाल उठ रहे हैं:

कही प्रांगण प्रभारी की मिलीभगत तो नहीं ?

अगर वास्तव में नोटिस दिया गया, तो अतिक्रमण अब तक क्यों बना हुआ है?

क्या मंडी सचिव की चुप्पी का मतलब कोई आंतरिक समझौता है?

जब किसान को बैठने की जगह नहीं, तो अतिक्रमण को खुली छूट क्यों?

मंडी प्रांगण में स्थिति यह है कि किसानों की उपज लाने में बाधा आने लगी है, जबकि अतिक्रमणकर्ता पूरी ढिठाई से कब्ज़ा जमाए बैठे हैं। कहीं बैठने की जगह नहीं, कहीं तौलने की जगह नहीं — लेकिन गैरकानूनी कब्ज़ों पर कोई रोक नहीं।

📌 बड़ा सवाल:

> *जब मंडी सचिव की आंखों के सामने नियमों की धज्जियाँ उड़ रही हों, तो क्या यह चुप्पी किसी के इशारे पर हो रही है*?””

“क्या ‘नोटिस’ महज़ एक दिखावा था, असली खेल पर्दे के पीछे खेला गया?”

📸 [संलग्न चित्रों में साफ देखा जा सकता हैScreenshot 20250708 222007

जहां किसान पसीना बहाकर फसल लाता है, वहां यदि उसकी जमीन पर कब्ज़ा हो जाए और जिम्मेदार अधिकारी मूक दर्शक बने रहें — तो यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था का अपमान है।

🔍 अब देखना यह होगा कि मंडी स

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चिव इस बार चुप्पी तोड़ते हैं या फिर यह मामला और गहराता है।

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