
हरिद्वार से बड़ी खबर: गणपति विसर्जन में गंगा की धारा में बहे युवक की तलाश जारी, प्रशासन पर उठे सवाल
📍 हरिद्वार, उत्तराखंड
हरिद्वार में बीती देर शाम एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। गणपति मूर्ति विसर्जन के दौरान एक युवक गंगा की तेज धारा में बह गया और अंधेरे में आँखों से ओझल हो गया। यह हादसा कनखल क्षेत्र के सती घाट पर हुआ, जहाँ घटना के बाद हड़कंप मच गया। युवक की तलाश पुलिस और एसडीआरएफ की टीम लगातार कर रही है, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
हादसे की पूरी कहानी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक अपने साथियों के साथ गणपति विसर्जन के लिए गंगा घाट पर पहुँचा था। मूर्ति को गंगा में प्रवाहित करने के बाद वह पानी में आगे तक चला गया। अचानक पैर फिसलने से युवक तेज बहाव में बह गया। घटना के समय अंधेरा और गंगा की उफनती धारा बचाव कार्य में बड़ी बाधा बनी। मौजूद लोगों ने चिल्लाकर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सब बेकार रहा।
इस पूरे हादसे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि युवक पानी के तेज बहाव में संघर्ष करता हुआ बह गया। आसपास खड़े लोग मदद के लिए शोर मचाते रहे लेकिन गंगा की धारा इतनी प्रचंड थी कि कोई कुछ कर नहीं पाया।
पुलिस और प्रशासन की कोशिशें
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, पीएसी और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुँची। रातभर तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन युवक का कोई पता नहीं चल पाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुबह होते ही गोताखोरों की मदद से खोजबीन तेज की गई है। जिला प्रशासन ने भी राहत-बचाव कार्यों के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।
कनखल थाना प्रभारी ने बताया कि हादसे की जगह पर लगातार चेतावनियाँ दी जा रही थीं। गंगा में बढ़े जलस्तर को देखते हुए घाटों पर पुलिस और प्रशासनिक अमला तैनात था। इसके बावजूद लोग चेतावनी की अनदेखी कर गंगा में उतर रहे थे।
प्रशासन की चेतावनी और जनता की लापरवाही
यह घटना प्रशासन और श्रद्धालुओं की लापरवाही दोनों पर सवाल खड़े कर रही है। दरअसल, पिछले कई दिनों से गंगा का जलस्तर खतरनाक स्तर पर बह रहा है। लगातार बारिश और पहाड़ों से आने वाला पानी गंगा को और प्रचंड बना रहा है। प्रशासन ने पहले ही मूर्ति विसर्जन जैसे आयोजनों पर रोक लगा रखी थी। जगह-जगह अनाउंसमेंट और मुनादी कर लोगों को सचेत किया जा रहा था।
इसके बावजूद श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के नाम पर गंगा में उतर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या अपनी धार्मिक भावनाओं को निभाने के लिए लोग अपनी और अपनों की जान जोखिम में डालने के लिए तैयार हैं? यह लापरवाही आखिर किस हद तक जायज मानी जा सकती है?
सोशल मीडिया पर चर्चा और नाराज़गी
हादसे का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। कई लोग प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं कि रोक के बावजूद विसर्जन कैसे हुआ। वहीं, कुछ लोग श्रद्धालुओं की लापरवाही को भी बराबर जिम्मेदार मान रहे हैं।
स्थानीय निवासी अशोक शर्मा ने कहा, “गंगा में जलस्तर बहुत ऊँचा है। प्रशासन बार-बार चेतावनी दे रहा है, लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं। अब इस लापरवाही का खामियाजा एक परिवार को अपनी संतान खोकर चुकाना पड़ सकता है।”
क्या है आगे की चुनौती?
युवक की तलाश जारी है। SDRF और गोताखोरों की टीम घाट-घाट पर तलाशी अभियान चला रही है। लेकिन गंगा की तेज धारा और गहराई बचाव अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रही है। पुलिस का कहना है कि जब तक युवक का पता नहीं चलता, तलाशी अभियान जारी रहेगा।
इस घटना ने एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पर्व और परंपराएँ अपनी जगह ज़रूरी हैं, लेकिन जान से बढ़कर कुछ भी नहीं। प्रशासन और पुलिस को भी चाहिए कि ऐसे आयोजनों पर रोक लागू कराने में और सख्ती दिखाएँ, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाएँ टाली जा सकें।
निष्कर्ष
हरिद्वार जैसे पवित्र स्थल पर हर साल लाखों लोग आस्था के नाम पर गंगा में स्नान और पूजन करने आते हैं। लेकिन आस्था और सुरक्षा दोनों का संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। बीती रात हुआ हादसा सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए सबक है। सवाल यही है कि आखिर हम कब समझेंगे कि नियमों की अनदेखी और आस्था की आड़ में की गई लापरवाही मौत को न्योता देने के बराबर है।
🖊️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक — समृद्ध भारत समाचार पत्र एवं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़










