

उत्तर प्रदेश मेरठ: दिनदहाड़े दबंग ने सड़क पर जा रही लड़की को रोककर किया अपहरण प्रयास – महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
मेरठ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां का दर्दनाक मामला शहर की व्यस्त सड़कों पर सामने आया, जहां दिनदहाड़े एक दबंग युवक ने सड़क से जा रही एक लड़की को रोक लिया और उसकी गर्दन पकड़कर दूर तक खींचता चला गया। इस घटना ने न केवल पीड़िता और उसके परिवार को सहमित कर दिया, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब लड़की सामान्य दिनचर्या के लिए सड़क मार्ग से जा रही थी। उस समय आसपास कई लोग मौजूद थे, लेकिन किसी ने दबंग व्यक्ति को रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। लड़की की चीख-पुकार सुनकर कुछ राहगीरों ने मदद करने की कोशिश की, लेकिन दबंग व्यक्ति का साहस इतना बढ़ा हुआ था कि वह उसे सड़क पर खींचता चला गया।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ रात में ही नहीं, बल्कि दिन में भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था, गश्त और नागरिक जागरूकता के बावजूद ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी के समान है कि महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ वक्त की पाबंदी या आभासी सुरक्षा उपायों तक सीमित नहीं हो सकती।
वर्तमान समय में ऐसे हालात पैदा हो गए हैं कि महिलाओं को अपना रास्ता तय करने में डर महसूस हो रहा है। खासकर युवा लड़कियों के लिए यह खतरा और भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई या सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं; समाज को भी जागरूक होना होगा और हर नागरिक को महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी होगी।
इस घटना की प्रतिक्रिया में स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि कैसे एक व्यक्ति दिन में ही इतनी हिम्मत दिखा सकता है और ऐसा करने के बावजूद उसे रोकने में आसपास के लोग और सुरक्षा तंत्र क्यों नाकाम रहे। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी विरोध जताया कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर अक्सर नेताओं के बयान भ्रामक और संवेदनाहीन हो सकते हैं। एक नेता द्वारा दिए गए बयान की चर्चा इस घटना के संदर्भ में हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाएं रात 12 बजे भी कहीं भी जा सकती हैं। ऐसे बयान जनता के लिए चिंता का कारण बनते हैं और सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता को कम करते हैं।
इस घटना ने यह भी उजागर किया कि सिर्फ कानून और पुलिस के भरोसे नहीं रहना चाहिए। महिलाओं और उनके परिवारों को खुद सतर्क रहना होगा, मार्गों और समय की योजना बनाना होगी और आस-पास के नागरिकों को भी उनकी सुरक्षा में सहयोग करना होगा। सुरक्षा के लिए तकनीकी उपाय जैसे मोबाइल ऐप, सीसीटीवी निगरानी और नियमित गश्त के बावजूद घटना ने स्पष्ट कर दिया कि इंसानी सतर्कता और सामाजिक जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है।
स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी दबंग की पहचान कर उसकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। पुलिस ने यह भी कहा कि पीड़िता की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाएगी और इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी ढांचे तक सीमित नहीं रह सकती। समाज के प्रत्येक वर्ग, नागरिक और सरकारी संस्थान को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि बेटियां दिन या रात किसी भी समय सुरक्षित महसूस करें और ऐसे भयावह हालात उनका जीवन प्रभावित न करें।
इस प्रकार, मेरठ की यह घटना सिर्फ एक isolated मामला नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। पुलिस और प्रशासन की तत्परता के साथ-साथ समाज की जागरूकता और जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, ताकि बेटियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाया जा सके।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ एवं समृद्ध भारत समाचार पत्र
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