
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्ट
काठमांडू। नेपाल की अंतरिम सरकार ने भारत के साथ ‘आपसी कानूनी सहायता संधि’ को मंजूरी दे दी है। इस संधि के जरिए दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों में सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम फैसला लिया गया।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री जगदीश खरेल ने बताया कि इस संधि का उद्देश्य सीमा पार अपराधों, जैसे — ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी, नकली मुद्रा और वित्तीय अपराधों पर रोक लगाना है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत और नेपाल के बीच अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह बनने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा।
नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पहल से भविष्य में अन्य देशों के साथ भी आपराधिक मामलों में कानूनी सहयोग को विस्तार मिलेगा। प्रस्तावों को जल्द ही राजनयिक चैनलों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
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नेपाल की विदेश नीति में नया मोड़ — 11 देशों से राजदूतों की वापसी
कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने 11 देशों में तैनात राजदूतों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है।
वापस बुलाए गए देशों में चीन, जर्मनी, इस्राइल, मलेशिया, कतर, रूस, सऊदी अरब, स्पेन, ब्रिटेन, अमेरिका और जापान शामिल हैं।
सरकार ने सभी राजदूतों को 6 नवंबर तक नेपाल लौटने के निर्देश दिए हैं। इस कदम को नेपाल की विदेश नीति में बड़े फेरबदल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले दिनों में भारत-नेपाल और अन्य वैश्विक साझेदारियों की दिशा तय करेगा।
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मधेश में नई सरकार — जितेंद्र प्रसाद सोनल ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
नेपाल के मधेश प्रांत में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के साथ जितेंद्र प्रसाद सोनल ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
सोनल, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी (एलएसपी) के नेता हैं, जिन्हें 107 में से 56 सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ है।
जनकपुरधाम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रांत की प्रमुख सुमित्रा सुभेदी भंडारी ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
सोनल की सरकार को जनता समाजवादी पार्टी नेपाल, जनमत पार्टी, सीपीएन (माओवादी सेंटर) और सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) का समर्थन हासिल हुआ है।
संविधान के अनुच्छेद 168 (2) के तहत गठित इस सरकार में जनमत पार्टी के महेश प्रसाद यादव और सीपीएन (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के कनीश पटेल ने भी मंत्री पद की शपथ ली, हालांकि फिलहाल उन्हें कोई विभाग आवंटित नहीं किया गया है।
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विश्लेषण
राजदूतों की वापसी और भारत के साथ कानूनी सहयोग संधि की मंजूरी से स्पष्ट है कि नेपाल की अंतरिम सरकार अपने पड़ोसी देशों के साथ नए संतुलन की तलाश में है। वहीं मधेश प्रांत में नई सरकार का गठन आंतरिक राजनीतिक स्थिरता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।







