
कुलपहाड़ (महोबा): 37 साल पुरानी जुगल किशोर मंदिर मूर्ति चोरी कांड आज भी अनसुलझा, न्याय की उम्मीद धुंधली
कुलपहाड़ थाना क्षेत्र के ग्राम सुगिरा स्थित ऐतिहासिक श्री जुगल किशोर मंदिर से वर्ष 1987 में अष्टधातु की बहुमूल्य मूर्तियों की चोरी आज भी क्षेत्रवासियों के लिए रहस्य बनी हुई है। घटना को 37 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन न तो चोरों का कोई सुराग मिला और न ही मूर्तियाँ बरामद हो सकीं। मामला आज भी न्यायालय में विचाराधीन है, जबकि पुलिस ने वर्षों पहले अंतिम रिपोर्ट लगाकर विवेचना बंद कर दी थी।
घटना का पृष्ठभूमि
03 फरवरी 1987 को मंदिर से अष्टधातु की कीमती मूर्तियाँ चोरी हो गई थीं। वादी मातादीन पाण्डेय पुत्र भानू प्रताप पाण्डेय निवासी सुगिरा की तहरीर पर मुकदमा अपराध संख्या 20/1987 धारा 457/380 भादवि के तहत दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने 03 मार्च 1987 को अंतिम रिपोर्ट संख्या 002 न्यायालय में प्रस्तुत कर विवेचना समाप्त कर दी।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह लगभग चार दशक पुराना मामला है। तमाम प्रयासों के बावजूद कोई सुराग हाथ नहीं लगा। दस्तावेजों में अंतिम रिपोर्ट लग चुकी है, इसलिए मामले के खुलासे की संभावना अब बेहद कम मानी जा रही है।
मंदिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
इतनी बड़ी घटना के बावजूद मंदिर प्रशासन और जनप्रतिनिधि किसी ठोस कदम के लिए आगे नहीं आए। लोगों का कहना है कि वर्षों से केवल आश्वासन मिलते रहे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ।
जनता में नाराज़गी
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर की चोरी पर वर्षों से कोई प्रगति न होने से क्षेत्रीय जनता में असंतोष व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक सुस्ती और कमजोर जांच के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया और न्याय की उम्मीद लगभग समाप्त हो गई।
निष्कर्ष
श्री जुगल किशोर अष्टधातु मूर्ति चोरी कांड प्रशासनिक ढिलाई और तंत्र की कमजोरियों का बड़ा उदाहरण बन चुका है। अब देखना यह है कि क्या कभी इस मामले में कोई नई पहल होती है या यह घटना हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दबकर रह जाएगी।








