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पचपेड़ी के लोढ़ाबोर में ‘हरियाली’ का खेल! लाखों खर्च, एक भी पौधा ज़िंदा नहीं — फिर से वही तैयारी?

पचपेड़ी के लोढ़ाबोर में ‘हरियाली’ का खेल! लाखों खर्च, एक भी पौधा ज़िंदा नहीं — फिर से वही तैयारी?

पचपेड़ी के लोढ़ाबोर में ‘हरियाली’ का खेल! लाखों खर्च, एक भी पौधा ज़िंदा नहीं — फिर से वही तैयारी?


संतनु कुमार कुर्रे रिपोर्टर बिलासपुर जिला से

लोढ़ाबोर (पचपेड़ी)। पिछले वर्ष जून माह में पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जनपद के अधिकारी-कर्मचारी और सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में हजारों पौधे लगाए गए, शपथ ली गई, बाउंड्री और गेट तक बनाए गए। मंच से पर्यावरण बचाने के बड़े-बड़े दावे किए गए।
लेकिन जमीनी हकीकत अब सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगाए गए पौधों की न तो नियमित सिंचाई हुई और न ही देखभाल। नतीजा—एक भी पौधा जीवित नहीं बचा। पूरा क्षेत्र सूखे पौधों और बर्बाद प्रयासों की गवाही दे रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि अब उसी स्थान पर फिर से गड्ढे खोदे जा रहे हैं और नए सिरे से पौधारोपण कार्यक्रम की तैयारी चल रही है। ग्रामीणों में चर्चा है कि क्या फिर से सरकारी राशि खर्च कर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाएगी?
यह मामला अब केवल पौधारोपण का नहीं, बल्कि जवाबदेही का बन चुका है। सवाल उठता है—क्या हर साल इसी तरह कागजों में हरियाली उगाई जाएगी? और यदि लाखों रुपए खर्च हुए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

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