

🏦 बड़ा खुलासा: “लंच टाइम” के नाम पर काउंटर बंद नहीं कर सकता बैंक — आरटीआई में चौंकाने वाली जानकारी सामने
सहारनपुर से बैंकिंग व्यवस्था को लेकर एक अहम तथ्य सामने आया है, जो आम उपभोक्ताओं के अधिकारों से सीधे जुड़ा है। अक्सर देखा जाता है कि दोपहर के समय बैंक पहुंचने वाले ग्राहकों को “लंच टाइम” कहकर इंतजार कराया जाता है या काम करने से मना कर दिया जाता है, लेकिन सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी ने इस प्रचलित व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गंगोह के मोहल्ला छत्ता निवासी अधिवक्ता योगेश चौधरी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत बैंक से लंच टाइम संबंधी नियमों की जानकारी मांगी थी। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी को दोपहर 2 बजकर 15 मिनट पर वे एक परिचित व्यक्ति के साथ पंजाब नेशनल बैंक, नानौता रोड शाखा गंगोह में करंट अकाउंट खुलवाने पहुंचे थे। आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने यह कहकर काम करने से मना कर दिया कि 2 बजे से 3 बजे तक बैंक में लंच टाइम होता है और इस दौरान कोई कार्य नहीं किया जाएगा।
इस घटना के बाद अधिवक्ता योगेश चौधरी ने आधिकारिक रूप से जानकारी मांगी कि क्या वास्तव में बैंकिंग कार्य पूरी तरह रोककर लंच किया जा सकता है? मंडल कार्यालय के जन सूचना अधिकारी द्वारा दिए गए जवाब में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद महत्वपूर्ण हैं।
आरटीआई जवाब के अनुसार:
🔹 शीतकालीन ऋतु में बैंकिंग कार्यदिवस के दौरान नाश्ता या लंच के लिए कोई अलग से निर्धारित सरकारी नियमावली नहीं है।
🔹 लंच से जुड़े दिशा-निर्देश बैंकिंग यूनियनों के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के अधीन हैं।
🔹 बैंक द्वारा इस विषय में कोई विशेष परिपत्र जारी नहीं किया गया है।
🔹 सबसे अहम — दोपहर 2 बजे से 3 बजे के बीच बैंकिंग व्यवसाय को प्रभावित किए बिना अंतराल में काउंटर संचालित रखने की व्यवस्था है।
🔹 लंच के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है, यानी पूरा काउंटर एक साथ बंद नहीं किया जा सकता।
इससे स्पष्ट होता है कि बैंक कर्मचारी एक साथ काम बंद कर लंच नहीं कर सकते, बल्कि रोटेशन प्रणाली से काउंटर चलते रहना चाहिए ताकि ग्राहकों को असुविधा न हो।
आरटीआई कार्यकर्ता योगेश चौधरी का कहना है कि “बैंक उपभोक्ताओं से सर्विस चार्ज लेते हैं, लेकिन सेवा देने के समय ‘लंच टाइम’ का बहाना बनाकर काम रोकना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।” उनका कहना है कि यदि काउंटर बंद मिलते हैं तो यह सीधे तौर पर बैंकिंग सेवा में लापरवाही मानी जानी चाहिए।
इस खुलासे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जिले के अन्य बैंक भी इसी तरह नियमों की अनदेखी कर रहे हैं? अगर आरटीआई में स्पष्ट है कि काम बाधित नहीं होना चाहिए, तो फिर आम जनता को घंटों इंतजार क्यों करना पड़ता है?
अब जरूरत है कि बैंक प्रबंधन इस विषय पर स्पष्ट निर्देश जारी करे और सुनिश्चित करे कि लंच के दौरान भी पर्याप्त स्टाफ काउंटर पर मौजूद रहे। इससे उपभोक्ताओं का समय बचेगा और बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद बैंक प्रशासन क्या सुधारात्मक कदम उठाता है या नहीं।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ | ब्यूरो चीफ – Hulchal India News, सहारनपुर
📞 खबर, विज्ञापन और सूचना हेतु संपर्क: 8217554083










