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सपनों की सौदेबाजी: ‘कैनविज’ के मायाजाल में फंसे गोंडा के ग्रामीण, करोड़ों डकार कर ठग फरार!

दोगुने का लालच और बाउंस चेक का सच: कन्हैया-राधिका के 'इन्वेस्टमेंट सिंडिकेट' ने जिले को लूटा।

अजीत मिश्रा (खोजी)

कैनविज’ के मायाजाल में फंसा गोंडा: करोड़ों डकार कर ठगों ने फेरा मुंह, अब कप्तानी चौखट पर न्याय की गुहार

गोंडा। सुनहरे भविष्य का सपना और पैसा दोगुना करने का लालच… बस यही वो हथियार थे जिनसे ‘कैनविज’ नाम के गिरोह ने मासूम ग्रामीणों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल दिया। जिले में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी का एक ऐसा काला सच सामने आया है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और कंपनी के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।Screenshot 20260311 164910

​बुधवार को जब ठगी के शिकार दर्जनों ग्रामीण आंखों में आंसू और हाथ में फर्जी कागजात लेकर पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के पास पहुंचे, तो जिले में सक्रिय ठगों के सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खुल गया।

3 साल में दोगुना… और फिर ‘गायब’ हो गया जमाना

​ठगी का खेल इतना शातिर था कि लोग आसानी से जाल में फंस गए। ‘कैनविज इंफ्रा कॉर्पोरेशन इंडिया’ और ‘कैनविज इंडस्ट्रीज’ के कर्ता-धर्ताओं—कन्हैया गुलाटी और राधिका गुलाटी—ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर ऐसी स्कीमें पेश कीं जो बैंक और शेयर बाजार को भी मात दे रही थीं।

  • स्कीम 1: ₹16,000 जमा करो, 3 साल में ₹32,000 ले जाओ।
  • स्कीम 2: ₹24,000 निवेश करो और 30 महीनों तक ₹2,000 की पेंशन (रिटर्न) पाओ।

कागजी नहीं, ‘करोड़ों’ का है खेल

​यह ठगी केवल हजारों की नहीं, बल्कि करोड़ों की है। पीड़ितों की फेहरिस्त लंबी है और उनके निवेश के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • सुरेंद्र कुमार, जय प्रकाश और राम किशन यादव: इन तीनों ने ₹36-36 लाख की भारी-भरकम राशि कंपनी के हवाले कर दी।
  • सुरेंद्र प्रताप सिंह: ₹5 लाख गंवाए।
  • संजय वर्मा: ₹12 लाख का चूना लगा।
  • रेनू सिंह और राधेश्याम वर्मा: क्रमशः ₹1.51 लाख और ₹6 लाख की चपत लगी।

​इसके अलावा, जिले के सैकड़ों छोटे निवेशकों ने ₹16-16 हजार की छोटी पूंजी लगाई थी, जो अब डूबती नजर आ रही है।FB IMG 1773227710079

बाउंस चेक और जान से मारने की धमकी

​जब निवेशकों ने अपना पैसा मांगना शुरू किया, तो कंपनी का असली चेहरा सामने आया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें जो चेक दिए गए, वे बैंक पहुंचते ही ‘रद्दी के टुकड़े’ साबित हुए। अब आरोपियों ने फोन बंद कर लिए हैं। हद तो तब हो गई जब पीड़ितों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क की कोशिश की, तो उन्हें न केवल भद्दी गालियां दी गईं, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी गई।

“यह महज एक जिले का मामला नहीं है। कन्हैया गुलाटी और उसकी टीम ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपना जाल फैला रखा है। यह एक संगठित अपराध है।”

एक पीड़ित निवेशक

 

एक्शन में कप्तान: अब होगी ‘कुर्की’ वाली कार्रवाई?

​मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विनीत जायसवाल ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने पीड़ितों से निवेश के साक्ष्य, बाउंस चेक और धमकी के रिकॉर्ड मांगे हैं। सूत्रों की मानें तो पुलिस अब इन कंपनियों के बैंक खातों को फ्रीज करने और आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने की तैयारी में है।

बड़ा सवाल: क्या सफेदपोश ठगों के हाथ कानून की पहुंच तक पहुंच पाएंगे? या फिर ‘कैनविज’ जैसे गिरोह नाम बदलकर किसी और जिले में नया जाल बुनना शुरू कर देंगे?

पड़ताल का कड़वा सच: > “यह केवल निवेश नहीं, बल्कि भरोसे का कत्ल है। जब कंपनियां बैंक से ज्यादा रिटर्न का वादा करें, तो समझ लीजिए कि आपकी मूल पूंजी पर खतरा मंडरा रहा है। ‘कैनविज’ का मॉडल केवल कागजों पर था, हकीकत में यह एक पोंजी स्कीम थी जिसका अंत हमेशा ऐसा ही होता है।” — अजीत मिश्रा (खोजी)

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