

हरदोई। सामाजिक धार्मिक संस्था प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति के द्वारा जनपद हरदोई की सांस्कृतिक चेतना इन दिनों एक नए उत्कर्ष की ओर अग्रसर है। “प्रहलाद नगरी” के रूप में इसकी पहचान अब केवल कल्पना या औपचारिक संबोधन न रहकर जनभावना का जीवंत स्वरूप बनती जा रही है। इस परिवर्तन के केंद्र में प्रहलाद नगरी जन कल्याण समिति के सतत, समर्पित और दूरदर्शी प्रयास है। जिन्होंने एक भूली-बिसरी सांस्कृतिक पहचान को पुनः जागृत करने का कार्य किया है। होली जैसे लोक आस्था, उल्लास और सांस्कृतिक एकता के महापर्व पर समिति द्वारा आयोजित प्रथम भक्त प्रहलाद जी की भव्य शोभा यात्रा इस परिवर्तन का ऐतिहासिक क्षण सिद्ध हुई। नगर की प्रमुख सड़कों और गलियों से होकर निकली इस शोभा यात्रा में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। जगह-जगह पुष्प वर्षा, भक्ति गीतों की गूंज, धर्म ध्वजाओं की शोभा और “प्रहलाद नगरी” के उद्घोष ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उद्घोषणा थी—जिसने हरदोई की पहचान को एक नए आयाम से जोड़ दिया। विगत में “प्रहलाद नगरी” का नाम केवल सीमित अवसरों तक ही सिमट कर रह गया था। कभी-कभार किसी विशिष्ट अतिथि अथवा जनप्रतिनिधि के स्वागत में यह संबोधन सुनाई देता था, मानो यह पहचान केवल औपचारिकता बनकर रह गई हो। किंतु वर्तमान परिदृश्य में यह स्थिति पूर्णतः परिवर्तित हो चुकी है। अब यह नाम जन जीवन का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है—चौराहों पर, सामाजिक आयोजनों में और यहाँ तक कि बच्चों की सहज बातचीत में भी “प्रहलाद नगरी” का उल्लेख सुनाई देना इस सांस्कृतिक जागरण की गहराई को दर्शाता है। इस नव चेतना के सूत्रधार समिति के अध्यक्ष शिवम द्विवेदी है। जिनके नेतृत्व में इस अभियान ने ठोस रूप ग्रहण किया। उनके मार्गदर्शन में समिति ने न केवल धार्मिक आयोजनों का सफल संचालन किया, बल्कि जन जागरण को भी अपनी प्राथमिकता बनाया। विभिन्न कार्यक्रमों, शोभा यात्राओं और सांस्कृतिक पहलों के माध्यम से इस विचार को जन-जन तक पहुँचाया गया, जिससे हरदोई की सांस्कृतिक अस्मिता को पुनः सशक्त आधार मिला। समिति के इन प्रयासों का परिणाम यह है कि आज “प्रहलाद नगरी” केवल एक ऐतिहासिक या पौराणिक संदर्भ नहीं, बल्कि हरदोई की आत्मा, उसकी आस्था और उसकी पहचान का प्रतीक बनता जा रहा है। यह एक ऐसी संकल्पना है, जो अतीत की गौरव शाली परंपराओं को वर्तमान की चेतना से जोड़ते हुए भविष्य के लिए एक सशक्त सांस्कृतिक आधार तैयार कर रही है। स्पष्ट है कि यदि यह सांस्कृतिक अभियान इसी प्रकार निरंतर गति और जन समर्थन प्राप्त करता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब हरदोई “प्रहलाद नगरी” के रूप में प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट और गरिमामयी पहचान स्थापित करेगा—जहाँ आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम सदैव जीवित रहेगा।





