
(फुरकान अंसारी)
हरिद्वार, 22 फरवरी 2026।
जगजीतपुर, फुटबॉल ग्राउंड हरिद्वार में जगजीतपुर मंडल के हिंदू समाज द्वारा शिवाजी विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने सपरिवार सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ हवन-पूजन एवं शंखध्वनि के साथ हुआ। इसके पश्चात मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
सनातन धर्म की विशालता और एकता का संदेश
मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन धर्म संसार का सबसे प्राचीन धर्म है, जिसे शाश्वत सत्य माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कला है।
उन्होंने कहा कि हिंदू एकता का अर्थ केवल राजनीतिक या सामाजिक जुड़ाव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सूत्र की पहचान है, जो करोड़ों लोगों को एक साथ जोड़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म की विशालता उसकी उदारता में निहित है। वर्तमान परिवेश में हिंदू एकता की आवश्यकता पहले से अधिक है। एकता का अर्थ अपनी जड़ों की रक्षा और सम्मान करना है।
सनातन धर्म को विशाल वटवृक्ष बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि इसकी जड़ें मजबूत होंगी तो इसकी शाखाएं पूरे विश्व में मानवता, शांति और प्रेम का संदेश फैलाती रहेंगी। संगठित हिंदू समाज ही सशक्त भारत और सुरक्षित भविष्य की नींव है।
उन्होंने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर, सोमनाथ मंदिर, उज्जैन स्थित महाकाल लोक तथा बद्री-केदार के पुनरुत्थान को हिंदू स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में उल्लेखित किया।
संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश
मुख्य वक्ता अनिल मित्तल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। उस समय भारत औपनिवेशिक परिस्थिति में था। डॉ. हेडगेवार का मानना था कि भारत की पराधीनता का मुख्य कारण हिंदुओं का बिखराव है।
उन्होंने व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का मंत्र दिया। एक छोटा-सा बीज आज विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। संघ को दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन के रूप में पहचान मिली है।
संघ शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास तथा आपदा, महामारी और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। शताब्दी वर्ष में संघ स्वदेशी, स्वभाषा और स्वसंस्कृति पर विशेष जोर दे रहा है।
पंच परिवर्तन का आह्वान
विशिष्ट अतिथि ममता डोबरियाल ने समाज में ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार के माध्यम से समाज और राष्ट्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यदि परिवार के भीतर पांच बुनियादी सुधार किए जाएं तो आदर्श समाज का निर्माण संभव है।
उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए विदेशी ब्रांड के स्थान पर स्वदेशी विकल्प अपनाने चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक का कम उपयोग, जल संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देना आवश्यक है।
सामाजिक समरसता अपनाकर जाति, धर्म और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त करना होगा।
कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत बिखरते परिवारों को बचाने, बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास करने और संयुक्त परिवार की परंपरा को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।
नागरिक कर्तव्यों के अंतर्गत यातायात नियमों का पालन, स्वच्छता बनाए रखना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व बताया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी शाम
कार्यक्रम का संचालन चित्रा शर्मा द्वारा किया गया। समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ।
कार्यक्रम में बच्चों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिनमें समा, रूही पाल, सृष्टि, परिधि, अवयव सैनी, सोनिया, अदिति एवं वर्षा सहित अन्य बच्चों ने भाग लिया।







