

⚡🚨 सहारनपुर ब्रेकिंग | सहारनपुर के नकुड़ में बिजली विभाग पर बड़ी कार्रवाई: अधिशासी अभियंता राजा कुमार निलंबित, बत्तीस लाख रुपये गबन में तकनीकी ग्रेड-दो पर मुकदमा, पाँच कर्मचारी निलंबित 🚨⚡
सहारनपुर जनपद के नकुड़ विद्युत वितरण खंड में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उपभोक्ताओं से वसूले गए लगभग बत्तीस लाख रुपये कार्यालय में जमा न करने तथा राजस्व हानि पहुँचाने के आरोप में पाँच बिजली कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के अंतर्गत नकुड़ के अधिशासी अभियंता राजा कुमार को निलंबित कर दिया गया है, जबकि तकनीकी ग्रेड-दो कर्मचारी सुशील कर्णवाल के विरुद्ध बत्तीस लाख रुपये के कथित गबन के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
यह पूरा प्रकरण पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाले विद्युत वितरण खंड नकुड़ से संबंधित है। विभागीय जांच में यह तथ्य सामने आया कि उपभोक्ताओं से वसूली गई धनराशि समय पर शासकीय खाते में जमा नहीं कराई गई, जिससे विभाग को भारी राजस्व हानि हुई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रबंधन ने कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उत्तरदायी ठहराया।
सूत्रों के अनुसार अधिशासी अभियंता राजा कुमार सहित दो लिपिक तथा दो लेखाकार भी दोषी पाए गए हैं, जिनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई है। विभागीय स्तर पर यह माना गया कि निगरानी व्यवस्था तथा वित्तीय नियंत्रण में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण इतनी बड़ी धनराशि के गबन की स्थिति उत्पन्न हुई।
बताया जा रहा है कि निगम के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उपभोक्ताओं की मेहनत की कमाई के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता सहन नहीं की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कदम उठाए जाएंगे।
तकनीकी ग्रेड-दो कर्मचारी सुशील कर्णवाल पर आरोप है कि उन्होंने उपभोक्ताओं से लगभग बत्तीस लाख रुपये की वसूली की, किंतु उक्त धनराशि को विभागीय खाते में जमा नहीं कराया। मामले में संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कर विधिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पुलिस तथा विभागीय जांच दल वित्तीय अभिलेखों एवं लेन-देन के विवरण की गहन जांच कर रहे हैं, जिससे संपूर्ण प्रकरण की सत्यता स्पष्ट हो सके।
इस कार्रवाई के पश्चात विभाग में हलचल की स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आंतरिक लेखा परीक्षण तथा निगरानी प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे प्रत्येक भुगतान की विधिवत रसीद अवश्य प्राप्त करें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना तत्काल उच्च अधिकारियों को दें।
यह मामला न केवल विभागीय पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वित्तीय अनुशासन में शिथिलता पाए जाने पर उच्च स्तर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। वर्तमान में जांच प्रक्रिया जारी है और आगे भी महत्वपूर्ण तथ्यों के सामने आने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
संपादक – एलिक सिंह
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