
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में वन विभाग ने निगला ‘हरा सोना’, कागजों में उगाए जंगल, जमीन पर सिर्फ लूट का बंजर!
- – कप्तानगंज रेंज में वृक्षारोपण के नाम पर करोड़ों का वारा-न्यारा, लालगंज के मथौली में बेखौफ कट रहे सागौन के कीमती पेड़
- – ‘गर्मी’ बनी अफसरों का कवच: रोपे गए पौधों को मृत दिखाकर बजट ठिकाने लगाने की साजिश
- लालगंज के मथौली में कुल्हाड़ियों का तांडव: वन विभाग की ‘शह’ पर कट रहे हरे सागौन, फिरौती में बट रही चांदी!
- बस्ती झुलस रही और विभाग मलाई चाट रहा: फर्जी वृक्षारोपण को छिपाने के लिए अब ‘गर्मी’ का सहारा लेने की तैयारी!
- मिशन ‘ग्रीन’ या भ्रष्टाचार की ‘क्लीन’ चिट? बस्ती मंडल में वन माफिया और अफसरों का खूनी गठजोड़ उजागर!
ब्यूरो, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में वन विभाग ने भ्रष्टाचार की ऐसी ‘अमरबेल’ फैलाई है जिसने जिले की हरियाली को ही निगल लिया है। एक तरफ पूरा प्रदेश भीषण लू और तपती धूप से झुलस रहा है, वहीं दूसरी तरफ बस्ती का वन विभाग अपनी जेबें भरने के लिए पर्यावरण की बलि चढ़ा रहा है। मामला कप्तानगंज वन रेंज और लालगंज के मथौली से जुड़ा है, जहाँ सरकारी फाइलों में तो जंगल लहलहा रहे हैं, लेकिन धरातल पर सन्नाटा और अवैध कटान का खूनी खेल जारी है।एक ओर आसमान से बरसती आग और 45 डिग्री के पार जाता पारा जनजीवन को झुलसा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति के रखवाले ही भक्षक बन बैठे हैं। बस्ती जनपद के कप्तानगंज वन रेंज और लालगंज क्षेत्र से भ्रष्टाचार की ऐसी ‘तप्त’ खबर सामने आ रही है, जिसने शासन के वृक्षारोपण अभियान की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। जिले में वन विभाग की मिलीभगत से करोड़ों के वृक्षारोपण घोटाले का जिन्न बाहर निकल आया है, जहाँ पेड़ जमीन पर नहीं, सिर्फ फाइलों में लहलहा रहे हैं।
फाइलों में ‘हरियाली’, धरातल पर ‘धूल’
शासन द्वारा हर साल ‘वृक्षारोपण महाभियान’ के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट बस्ती मंडल को आवंटित किया जाता है। कप्तानगंज वन रेंज में इस बजट का जो हाल हुआ है, वह रोंगटे खड़े करने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, रेंज की दर्जनों साइटों पर केवल कागजों में गड्ढे खोदे गए और कागजों में ही पौधों की रोपाई कर दी गई।कप्तानगंज वन रेंज में वृक्षारोपण के नाम पर बड़ा खेल खेला गया है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में दर्जनों ऐसी साइट्स दिखाई गई हैं जहाँ भारी-भरकम बजट खर्च कर पौधरोपण का दावा किया गया। हकीकत यह है कि इन साइटों पर एक भी पौधा जीवित नहीं है। अब विभाग अपनी गर्दन बचाने के लिए भीषण गर्मी का बहाना बना रहा है, ताकि मृतप्राय पौधों की आड़ में बंदरबाँट किए गए बजट को ठिकाने लगाया जा सके।
बड़ा सवाल: यदि पिछले 5 साल के वृक्षारोपण की निष्पक्ष ‘क्रॉस जाँच’ हो जाए, तो कई रेंजर और बाबू सलाखों के पीछे होंगे। सरकारी धन की ऐसी निर्मम बर्बादी ने ही आज बस्ती को ‘भट्टी’ बना दिया है।
साजिश का नया पैंतरा: अब जबकि जांच की आंच आने का डर है, तो विभाग के भ्रष्ट सिपहसालार ‘भीषण गर्मी’ को ढाल बना रहे हैं। योजना यह है कि इन फर्जी साइटों पर पौधों को ‘सूखा और मृत’ घोषित कर दिया जाए, ताकि रोपाई और रखरखाव के नाम पर डकारी गई करोड़ों की धनराशि का हिसाब बराबर हो सके।
मथौली में सागौन का ‘सफाया’, माफिया और विभाग की जुगलबंदी
भ्रष्टाचार की इंतहा यहीं खत्म नहीं होती। लालगंज के मथौली क्षेत्र में इन दिनों कुल्हाड़ियों की गूंज सुनाई दे रही है। यहाँ अवैध रूप से हरे सागौन के पेड़ों का कत्लेआम किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर लकड़ी माफिया रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी हरियाली उजाड़ रहे हैं।घोटाला सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, जमीन पर खड़े हरे पेड़ों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। लालगंज के मथौली में इन दिनों अवैध कटान का नंगा नाच जारी है। माफियाओं के साथ मिलकर वन विभाग के जिम्मेदार हरे सागौन के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलवा रहे हैं।
- सौदा: सूत्रों का कहना है कि हर पेड़ के कटान के बदले मोटी ‘फिरौती’ तय है।
- परिणाम: पर्यावरण का संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है, लेकिन जिम्मेदारों की जेबें गर्म हो रही हैं।
- फिरौती का खेल: चर्चा है कि प्रति पेड़ एक निश्चित ‘कमीशन’ ऊपर तक पहुंच रहा है। यही कारण है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं।
- पर्यावरण को चोट: एक ओर सरकार एक-एक पेड़ लगाने की अपील कर रही है, वहीं दूसरी ओर मथौली में दशकों पुराने पेड़ों को चंद रुपयों की खातिर कटवाया जा रहा है।
पाँच साल की ‘क्रॉस जाँच’ से कांप रहे जिम्मेदार
यदि शासन या प्रशासन कप्तानगंज रेंज में पिछले पांच वर्षों के भीतर हुए वृक्षारोपण और पौधों के जीवित रहने की दर (Survival Rate) की क्रॉस चेकिंग करा ले, तो जिले का सबसे बड़ा ‘वृक्षारोपण घोटाला’ उजागर होना तय है। सूत्रों का कहना है कि नर्सरी से लेकर रोपाई तक के मस्टररोल में भारी फर्जीवाड़ा किया गया है।
बढ़ता तापमान और विभाग की बेशर्मी
आज जब बस्ती का पारा 45 डिग्री सेल्सियस पार कर रहा है, तब इस तबाही के पीछे वन विभाग का यही भ्रष्टाचार सबसे बड़ा कारण है। पेड़ों की संख्या बढ़ने के बजाय घट रही है, जिससे जिले का इको-सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। विभागीय मिलीभगत से हो रहे इस ‘पर्यावरणीय अपराध’ ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है।
अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इन ‘रक्षकों’ पर कोई कड़ी कार्रवाई करेगा या फिर हरियाली की यह लूट यूं ही बदस्तूर जारी रहेगी?
रिपोर्ट की मुख्य कड़ियाँ:
- फर्जी मस्टररोल: कागजों पर मजदूरों और पौधों की संख्या में हेरफेर।
- सागौन तस्करी: लालगंज क्षेत्र में विभागीय संरक्षण में अवैध कटान।
- बजट की बंदरबाँट: रख-रखाव के नाम पर आने वाले लाखों रुपये डकारे गए।
- जाँच की मांग: सामाजिक संगठनों ने उच्च स्तरीय जांच की चेतावनी दी।
प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल
शासन प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये पर्यावरण बचाने के नाम पर पानी की तरह बहा रहा है, लेकिन कप्तानगंज से लेकर लालगंज तक फैला यह भ्रष्टाचार तंत्र सरकार की साख पर बट्टा लगा रहा है। क्या उच्चाधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर इन खाली पड़ी ‘वृक्षारोपण साइटों’ का निरीक्षण करेंगे? या फिर भ्रष्टाचार की इस ‘छाया’ में हरियाली का कत्ल यूं ही जारी रहेगा?


















