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उत्तर प्रदेशबस्ती

बस्ती: वन विभाग की ‘शह’ पर कट रही हरियाली, रमवापुर में माफियाओं को खुली छूट

रक्षक ही बने भक्षक! दुबौलिया में अवैध कटान पर वन दरोगा और रक्षक की संदिग्ध भूमिका ​महुआ और आम की कटान से वन विभाग मौन, सरकारी खजाने को लग रहा प्रतिमाह लाखों का चूना ​बस्ती: क्या चिलमा-दुबौलिया बीट में 'पर्यावरण के हत्यारों' का राज है? ​तीसरी बार कटी 'विरासत', क्या कुंभकर्णी नींद से जागेगा कप्तानगंज वन रेंज का महकमा?

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: दुबौलिया में वन विभाग की मौन सहमति से ‘हरियाली’ पर चल रही कुल्हाड़ी, महकमे की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

  • दुबौलिया में धड़ल्ले से हो रही अवैध कटान, वन दरोगा की कार्यशैली पर उठे सवाल
  • वन विभाग की मिलीभगत से रमवापुर में अवैध कटान का काला खेल जारी
  • बस्ती: बिना परमिट पेड़ों की कटाई, कार्रवाई के नाम पर हो रही लीपापोती
  • पर्यावरण के दुश्मन या वन विभाग की लापरवाही? दुबौलिया में अवैध कटान पर प्रशासन खामोश
  • क्या यही है ‘वृक्षारोपण अभियान’ का सच? दुबौलिया में खुलेआम काटे जा रहे हरे-भरे पेड़

बस्ती: एक तरफ सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और वृक्षारोपण महाअभियान चला रही है, वहीं बस्ती जिले के कप्तानगंज वन रेंज के अंतर्गत दुबौलिया ब्लॉक में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कथित मिलीभगत से हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटान का काला कारोबार फल-फूल रहा है।

रमवापुर बना अवैध कटान का केंद्र

​मामला ग्राम पंचायत सरैया बक्शी के राजस्व गांव रमवापुर का है। सूत्रों के अनुसार, यहां बिना परमिट के आम के पेड़ों का कटान किया गया, लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी वन विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न करना विभाग की संलिप्तता की ओर इशारा कर रहा है। आरोप है कि हल्का वन दरोगा अभिषेक यादव और वन रक्षक शाश्वत दूबे मौके पर पहुंचकर कानूनी कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने और लीपापोती करने में जुटे हैं।

तीसरी बार महुआ पर चला आरी, विभाग बना तमाशबीन

​हैरानी की बात तो यह है कि इसी ग्राम पंचायत रमवापुर राजा में तीसरी बार महुआ जैसे बहुमूल्य और संरक्षित पेड़ को काट गिराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन दरोगा अभिषेक यादव और वन रक्षक शाश्वत दूबे की शह पर चिलमा और दुबौलिया बीट में अवैध कटान का खेल प्रतिदिन जारी है। इस ‘सुनियोजित संरक्षण’ के चलते लकड़ी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई डर नहीं रह गया है।

पर्यावरण को खतरा, खजाने को करोड़ों का चूना

​वन विभाग के इन जिम्मेदार कर्मचारियों की कथित मनमानी से न केवल दुबौलिया क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) खतरे में पड़ गया है, बल्कि सरकारी खजाने को भी लाखों रुपये प्रतिमाह की चपत लग रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो पर्यावरण सुरक्षित कैसे होगा?

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

​अवैध पेड़ कटान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग के उच्चाधिकारी इन कर्मचारियों के संरक्षण में हो रहे इस अवैध कारोबार से अनजान हैं? या फिर यह मिलीभगत की एक बड़ी कड़ी है जिसे जांच की आवश्यकता है।

​क्षेत्रीय जनता ने अब जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:

  • ​दुबौलिया और चिलमा बीट में हुई अवैध कटान की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • ​हल्का वन दरोगा अभिषेक यादव और वन रक्षक शाश्वत दूबे की संदिग्ध भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित हो।

क्या अब भी जागेगा वन विभाग या ‘पर्यावरण के हत्यारों’ को संरक्षण मिलता रहेगा?

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